रीवा जिले के चोरहटी ग्राम मे रहने वाले श्री अशोक चतुर्वेदी दो एकड़ के एक छोटे से रकबे मे खेती करते हैं । ब्लाक रीवा के अंतर्गत आने वाला यह गाँव एनएच –क्र 27 से मात्र एक किमी भीतर है ।श्री चतुर्वेदी के परिवार मे दो पुत्र , वृद्ध पिता व पत्नी समेत पाँच सदस्य हैं । श्री चतुर्वेदी 45 वर्ष के हैं व 12वी उत्तीर्ण हैं । परिवार के मुखिया होने के कारण परिवार की सारी ज़िम्मेदारी श्री अशोक चतुर्वेदी ही वहन करते है । पूर्व मे पारंपरिक खेती करने के कारण परिवार के सामने आर्थिक समस्या बार बार उत्पन्न होती थी । गेंहू , चना व धान मे लागत लगाने के तीन से चार माह बाद उपज प्राप्त होने के बाद ही रुपयो की व्यवस्था हो पाती थी ।जो रुपये प्राप्त होते थे वह भी पर्याप्त नहीं थे , ठीक से घर का गुजारा भी नहीं हो पाता था । वर्षा की स्थिति मे अकस्मात परिवर्तन व अन्य कारणो से भी उपज प्रभावित होती थी जिस कारण लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था ।कृषि लागत व अन्य खर्चो के लिए साहूकार व रिश्तेदारों से उधार लेने की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती थी ।

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इफको के संपर्क मे आने के बाद से श्री चतुर्वेदी का झुकाव जल विलेय उर्वरको की तरफ बढ़ा । जल विलेय उर्वरक एनपीके 18:18:18 का संस्तुत मात्रा मे उपयोग व इफको द्वारा लगातार प्रोत्साहन प्राप्त होने के कारण श्री चतुर्वेदी ने पारंपरिक खेती छोडकर सब्जी व फूलों की खेती की तरफ ध्यान दिया । श्री चतुर्वेदी के अनुसार उन्होने कोर्डेट फूलपुर एवं कृषि विज्ञान केंद्र मझगंवा मे इफको रीवा के कृषक प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रमों मे भाग लेकर वहाँ से प्राप्त ज्ञान के आधार पर सब्जी खेती को अपनाया है , इसलिए अपनी प्रगति मे पूरा श्रेय इफको को देते हैं । शहर से नजदीक होने के कारण रोजाना सब्जी के विपणन मे भी अधिक समस्या नहीं आई । श्री चतुर्वेदी अब बैगन , भिंडी , टमाटर , बरबटी , गेंदा , शकरकंद व स्वीट कार्न व प्याज की खेती कुल दो एकड़ के रकबे मे करते हैं । प्रतिदिन सुबह पाँच बजे उठकर परिवार सहित मंडी ले जाने के लिए ताजी सब्जियाँ व फूल खेत से तोड़ते है व मंडी ले जाकर उचित दामो मे बेचते है । श्री चतुर्वेदी वर्तमान समय मे पिछले ढाई महीने से प्रतिदिन डेढ़ से दो क्विंटल बैगन व पचास किलो भिंडी बेंच रहे है । श्री चतुर्वेदी ने बताया की उन्हे ढाई महीने से प्रतिदिन करीब तीन से साढ़े तीन हज़ार रुपयो का मुनाफा प्राप्त हो रहा है । श्री चतुर्वेदी अपनी सफलता का श्रेय इफको के मार्गदर्शन व जल विलेय उर्वरको को देते है ।

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श्री चतुर्वेदी ने खेत को चार भागो मे बाँट दिया है , आधा एकड़ मे बैगन, आधा एकड़ मे भिंडी , आधा एकड़ मे गेंदा के फूल तथा आधा एकड़ मे कद्दूवर्गीय फसलें लौकी, पेठा , तोरई आदि का उत्पादन लेकर पुनः सब्जी जैसे टमाटर , प्याज , आलू आदि फसलें लेते हैं । साल भर मे उनके द्वारा लागत मे 75000 रुपये व्यय किए गए हैं व तीन लाख रुपयों का लाभ हुआ है । बैगन का उत्पादन अभी अक्तूबर तक होगा जिससे अनुमानित 50 क्विंटल उत्पादन और मिलने का अनुमान है । गेंदा फूल के पौधे लगाए जा चुके है जिससे दिवाली के समय फूल उत्पादन प्राप्त होने लग जाएगा । भिंडी की फसल जोतकर टमाटर लगाने की तैयारी हो रही है। परिवार के दो बच्चे एवं पत्नी मजदूरो के साथ सहयोग कर उत्पादन मे सहयोग करते हैं। श्री चतुर्वेदी की मेहनत , लगन , रुचि एवं नए नए प्रयोग करने की आदत तथा इफको अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिको से संपर्क तथा उनके द्वारा दी गई जानकारी एवं सलाह मानकर खेती करने के कारण आज वह एक खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहें है तथा उन्नत खेती कर रहें है ।

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