कारोबार का विस्तार करते हुए 500 करोड़ रुपये के निवेश और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ जैविक क्षेत्र में प्रवेश
अनुसंधान एवं विकास आधारित कृषि-कंपनी एक्वाएग्री में 50% इक्विटी का अधिग्रहण

24 जुलाई, 2017; नई दिल्लीः उर्वरक क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने आज सिक्किम सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की। इफको, जैविक कृषि के क्षेत्र में व्यापारिक संभावनाओं की तलाश हेतु ‘‘सिक्किम इफको ऑर्गेनिक्स लिमिटेड’’ (सिक्किम-इफको) नाम से एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने जा रही है। सिक्किम–इफको में इफको की हिस्सेदारी 51% होगी जबकि सिक्किम सरकार की हिस्सेदारी 49% होगी। इस परियोजना में लगभग 200 करोड़ रुपये का आरंभिक निवेश किया जाएगा, जिसे विभिन्न चरणों में बढ़ाकर 500 करोड़ कर दिया जाएगा।

इफको ने एक्वाएग्री प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड में 50% हिस्सेदारी खरीदने की भी घोषणा की है। यह कंपनी भारत में समुद्री खरपतवार की खेती और प्रसंस्करण क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है। इफको इस हिस्सेदारी की खरीद 11 करोड़ रुपये में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहयोगी संस्था इफको ई–बाजार लिमिटेड के जरिए करेगी।

समुद्री खरपतवार की खेती और उसका उपयोग एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। यह माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी योजना का भी अहम हिस्सा है। एक्वाएग्री भी इसी दिशा में काम कर रही है और कृषि, पशुपालन व मत्स्य–पालन के क्षेत्र में रोज़गार पैदा करने की क्षमता रखती है।

“सागरिका”, इफको और एक्वाएग्रो द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक प्रमुख ब्रांड है, जिसे भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री श्री हर्ष वर्धन ने प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर औपचारिक रूप से लॉन्च किया था।

यह एक कार्बनिक जैव-उत्प्रेरक है, जो लाल और भूरे रंग की समुद्री खरपतवार से तैयार की जाती है। पैदावार बढ़ाने के साथ–साथ इसमें तनाव प्रतिरोधक क्षमता भी मौजूद है। यह तरल और दानेदार दोनों रूपों में उपलब्ध है। इन उत्पादों को लेकर किसानों की यह तरल और दानेदार दोनों रूपों में उपलब्ध है। यह तरल और दानेदार दोनों रूपों में उपलब्ध है। इन उत्पादों को लेकर किसानों की शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक और उत्साहजनक रही है।

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक्वाएग्री के अनुसंधान औरविकास केन्द्र को मान्यता प्रदान की है। इस अनुसंधान केंद्र द्वारा ह्युमिक पदार्थ, बायो एक्टिव और अन्य वैकल्पिक पोषण स्रोतों की सहायता से जैविक उत्पादों का विकास किया जाता है। केन्द्र ने जैव कीटनाशकों के क्षेत्र में, विशेष रूप से नीम और उससे निर्मित उत्पादों पर काफी काम किया है।

एक्वाएग्री समुद्री खरपतवार बायोमास से खाद्य उद्योग के लिए हाइड्रोकोलॉइड का भी उत्पादन करता है, जो अब तक पूरी तरह आयात पर ही निर्भर था। आलू के प्रसंस्करण की संभावनाओं का पता लगाने तथा भुट्टे व उसके अपशिष्ट जैसे फसल कचरों से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने में कंपनी के खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अर्जित अनुभवों का लाभ मिलेगा।

इफको जल्द ही फसल सुरक्षा और पोषण के लिए जैविक और गैर-रसायन आधारित उत्पादों की शृंखला शुरू करेगी। इससे किसानों और घरेलू उद्यान में रुचि रखने वाले लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकेगी। इसमें जैव शोधन पद्धति के जरिए एक ही बायोमास के इस्तेमाल से बहु उत्पाद बनाने के लिए समुद्री खर पतवार, ताजे पानी के खरपतवार और बायो एक्टिव संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।

इस उत्पाद शृंखला के अंतर्गत औद्योगिक स्तर पर उत्पादन और पैकेजिंग का कार्य सिक्किम-इफको द्वारा सिक्किम में किया जाएगा। इस सुविधा से पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की जैविक आदान संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। सरकार की घोषित नीति के अनुरूप यह एक बृहद् जैविक कृषि क्षेत्र बनने जा रहा है। इफको इस क्षेत्र से फूलों और जड़ी बूटियों सहित जैव उत्पादों के स्रोतों की तलाशकर उन्हें भारत-भर में विभिन्न कंपनियों को उपलब्ध कराएगी।

इन उत्पादों को पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सात बहनें’ कहे जाने वाले इस क्षेत्र के प्रत्येक राज्य में कम से कम दो इफको ई-बाज़ार केंद्र खोले जाएंगे।

इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने इस अवसर पर कहा कि हम किसानों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद और मूल्य संवर्धन के साथ–साथ उपभोक्ताओं के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धी कीमत उपलब्ध कराने पर हमेशा ध्यान देते रहे हैं। हम जैव उत्पाद श्रेणी के साथ–साथ जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशकों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

डॉ. अवस्थी ने आगे कहा कि ऐसे महान उद्यम और अच्छे विचार भी जो लाभकारी सिद्ध नहीं हुए, शीघ्र भुला दिए गए, क्योंकि वे टिकाऊ नहीं थे। उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में जैविक कृषि के अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इफको वर्ष 2018-19 के दौरान 20 लाख लीटर सागरिका (तरल) और 20,000 मीट्रिक टन सागरिका (दानेदार) की बिक्री हेतु योजना बना रही है।

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