राइजोबियम एक परिचय-

rhizobium4पौधे के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है नाइट्रोजन, खेती में इसकी आपूर्ति बाहर से करने पर इसकी लागत बहुत ज्यादा आती है। मिट्टी में बाहर से मिलाया जाने वाले रासायनिक नाइट्रोजन खाद को फसल ग्रहण कर लेता है और मिलाए गए नाइट्रोजन का तकरीबन 65 फीसदी हिस्सा या तो जल निकासी की वजह से खत्म हो जाता है या वातावरण में गैस बनकर उड़ जाता है। यूं तो धरती का 78 फीसदी वातावरण नाइट्रोजन से बना है लेकिन इसकी निष्क्रिय प्रकृति की वजह से ये चयापचयी रूप में या मेटाबॉलिकली उंचे पौधों के लिए उपलब्ध नहीं हो पाता है। हालांकि माइक्रोऑर्गेनिज्म या सूक्ष्मजीव की कुछ प्रजातियां जैविक नाइट्रोजन निर्धारण या बायोलॉजिकल नाइट्रोजन फिक्सेशन (बीएनएफ) के माध्यम से इसे उपलब्ध करा सकती है जिसमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन अमोनिया में परिवर्तित हो जाती है। ये सूक्ष्मजीव जड़ की सतह को ठीक तरीके से जमाने में सक्षम है और फसल को तब फायदा पहुंचाती है जब जड़ों के जरिए कार्बन की आपूर्ति की जाती है। बायोलॉजिकल नाइट्रोजन फिक्सेशन यानी बीएनएफ का सालाना योगदान 175 मिलियन टन नाइट्रोजन अनुमानित है। विभिन्न नाइट्रोजन निर्धारक सूक्ष्मजीवों में,  फली या छीमी फसलों के साथ सहजीवी समूह का निर्माण करने वाला विशेष जीवाणु (बैक्टीरिया) राइजोबिया,  वैश्विक नाइट्रोजन चक्र में 120 मीट्रिक टन प्रति वर्ष का योगदान करता है।

फली या छीमी- राइजोबिया सहजीवन

rhizobium3दाल (लेगुमिनोस परिवार, फली पौधा) उच्च गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन,  हड्डी निर्माण के लिए जरूरी खनिज पदार्थों और अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी विटामिन्स का महत्वपूर्ण श्रोत है। अनाज के विपरीत दाल का उत्पादन आमतौर पर सामान्य खेतों में कम से कम खाद के उपयोग से हो जाता है। इसीलिये,  नाइट्रोजन से युक्त फली या छीमी, वर्षा सिंचिंत कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अरहर या तूअर, चना या काबूली चना, मूंग, ऊड़द बीन, मसूर जैसे दाल की कारोबारी सफलता राइजोबिया की पौधों की जड़ों के गांठ के साथ सहजीविता पर निर्भर करता है। राइजोबिया मिट्टी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया या जीवाणु हैं जो फलीय पौधों के घनी जड़ों को प्रभावित करता है,  गांठ का विकास करता है और फली की जड़ों में नाइट्रोजन की छोटी फैक्ट्री बन जाता है। गांठ के अंदर,  राइजोबिया वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन को पौधे के भीतर (उपलब्ध रुप में) स्थानांतरित कर देता है। बैक्टीरिया या जीवाणु के लिए पौधा नाइट्रोजन को स्थापित करने के लिए घर एवं ऊर्जा उपलब्ध कराता है। बदले में पौधा गांठ से एक निश्चित मात्रा में नाइट्रोजन प्राप्त करता है और भोजन और प्रोटीन का उत्पादन करता है।

प्रभावी संचारण का मूल्यांकन कैसे करें?

rhizobium1पौधारोपन के 21 से 28 दिन के बाद गांठों को देखा जा सकता है। प्रभावकारी गांठ आम तौर पर बड़ा होता है और जो प्राथमिक और ऊपरी जड़ों पर गुच्छेदार रुप में होता है। राइजोबियम गांठकरण की प्रभावशीलता को फूल खिलने के शुरुआत में गांठ वाली पौधे के गांठ की छंटाई कर और गांठ के रंग को देख कर परखा जा सकता है। प्रभावकारी गांठ के भीतर लाल वर्णक लेगामोग्लॉबिन होते हैं, जो सक्रिय नाइट्रोजन योगिकीकरण के साथ जुड़े होते हैं। इसके विपरीत निष्क्रिय गांठ छोटे, ढेर सारे और सामान्यतौर पर जड़ व्यवस्था में बंटे होते हैं। इस तरह की स्थिति में, बड़े आकार का प्रतियोगी इनोक्यूलम और बेहद प्रभावकारी राइजोबिया की जरूरत पड़ती है जो स्थानीय आक्रामक राइजोबिया का मुकाबला कर सके।

बीज टीकाकरण की पद्धति-

rhizobium2राइजोबियम कल्चर की व्यावसायिक तैयारी चारकोल या लिग्नाइट आधारित पाउडर के रुप में उपलब्ध है। राइजोबियम कल्चर राज्य के कृषि विभाग और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से खरीदी जा सकती है। राइजोबियम का एक पैकेट (200 ग्राम) प्रति 10 किलोग्राम बीज के लिए पर्याप्त है। फली या छीमी के टीकाकरण का सबसे सामान्य तरीका बीज के साथ कम से कम स्टीकर के घोल (दस फीसदी सुक्रोज हो) के साथ राइजोबियम को एक मात्रा में मिला देना होता है। टीकाकृत बीज को छाया में सुखाना चाहिए और तुरंत उसकी रोपाई कर देनी चाहिए।

 

राइजोबियम के फायदे-

  1. कम लागत
  2. नाइट्रोजन की उपलब्धता और ग्रहण करने की क्षमता को बढ़ाता है
  3. मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाता है और आनेवाली फसल को फायदा पहुंचाता है
  4. वातावरण के मित्र की तरह काम करता है

क्या करें और क्या ना करें :-

  1. अलग फली या छीमी अलग अलग राइजोबिया की मांग करती है। प्रत्येक फलीय पौधे के लिए उचित राइजोबिया का चुनाव होना चाहिए।
  2. अरहर या तूअर, मूंग, उर्दबीन- ब्रेडीरिजोबियम एसपी
  3. चना या काबुली चना, मसूर की दाल, मटर- राइजोबियम लेगुमिनोसेरम बीवी. वाईसी
  4. राजमा- राइजोबियम लेगुमिनोसेरम बीवी. फेजओली
  5. इनोक्यूलेंट या टीका ताजा होना चाहिए
  6. जब तक कि इस्तेमाल ना हो तब तक इनोक्यूलेंट या टीका को ठंडी जगह पर रखना चाहिए। इसे सूर्य की गर्म रोशनी से दूर रखना चाहिए ताकि ज्यादा सूखने से बचाया जा सके।
  7. जब बीज का उपचार फफूंदनाशी से किया जा रहा हो तब राइजोबियम कोटिंग का काम अंतिम होना चाहिए।
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