गुजरात के अमरेली ज़िले के मोटा देवाल्या गांव में एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनसुखभाई जगानी बहुत पढ़े लिखे नहीं हैं। लेकिन कम पढ़े लिखे मनसुखभाई के अन्वेषण पर अमेरिका और भारत में दो पेटेंट उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है।

BulletSanti 1मनसुखभाई का जीवन समस्याओं से घिरा रहा है। परिवार की विपन्नता ने की वजह से वो पढ़ लिख नहीं पाए। परिवार को आर्थिक मदद करने के मकसद से उन्हें प्राथमिक स्तर पर ही स्कूल छोड़ दिया और किसानी में अपने पिता की मदद करने लगे। इतनी विपन्नता में भी मनसुखभाई का जीवन के प्रति बढ़ा ही सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।

 

हालांकि इन समस्याओं को अपनी राह का रोड़ा बनाने की बजाए उन्होंने इनको अपने लिए अवसर के रूप में परिणत कर दिया। मनसुखभाई बताते हैं ” मैं हमेशा आविष्कारक बनना चाहता था और ऐसी चीजों का निर्माण करना चाहता था जो पहले BulletSanti5नहीं हुई हों।”

उनके गांव में किसान कठिन संकट से गुजर रहे थे। गांव अकाल का सामना कर रहा था। पानी के संकट और बैलों की मौत से किसान खेती छोड़ने को मजबूर थे। संकट की इस घड़ी में बैलों की जगह पर ट्रैक्टर खरीदने का तो सवाल ही नहीं उठता।

इन्हीं परिस्थितियों में मनसुखभाई ने इलाके में तमाम किसानों की समस्याओं के सामाधान के लिए कुछ ऐसा बनाने की ठानी जो उन तमाम किसानों का सहारा बन सके।

कुछ समय तक दूसरों की खेतों में मजदूरी करने के बाद उन्होंने हीरा उद्योग में अपनी किस्मत आज़माने की सोची। उन्होंने सूरत में एक हीरा फैक्टरी में काम करना शुरू किया लेकिन ये काम उन्हें रास नहीं आया। उन दिनों को याद करते हुए BulletSanti3मनसुखभाई कहते हैं ” मेरे मन में इस बात को लेकर संशय था कि या तो खेती करता रहूं या खुद का वर्क शॉप खोल लूं। अंतत मैंने अपना एक वर्कशॉप खोलने का निश्चय किया। साथ ही साथ खेती भी जारी रखने का फैसला किया।

मरम्मत औऱ निर्माण की छोटी सी इकाई खोलना बस एक छोटी सी शुरूआत थी। मशीनों और उपकरणों के बारे में जुनूनी मनसुखभाई ने किसानों के लिए कम लागत के उपकरणों को लेकर अपने विचार को अमली जामा पहनाने का फैसला किया जिससे उन किसानों की मदद की जा सके जो कृषि कार्यों को सुगम बनाने के लिए बेहतर और सरल उपकरण चाहते थे।

तब से लेकर आज तक उनके जीवन के तकरीबन दो दशक बीत गए। आज मनसुखभाई की पहचान उस इलाके में खेती से जुड़े उपकरणों के निर्माता के तौर पर स्थापित हो गई है। वो विभिन्न कृषि उपकरणों के निर्माण, डीजल इंजन और कृषि उपकरणों की मरम्मत के साथ ही वो ऐसी ही कई अन्य तरह की सेवाएं किसानों को उपलब्ध कराते हैं।

तकरीबन 4-5 सालों के परीक्षण के बाद साल 1994 में मनसुखभाई ने मोटरसाइकिल में लगने वाली खेती किसानी के लिए एक बहुपयोगी उपकरण तैयार किया। इन उपकरणों को 325 सीसी हार्सपावर वाली किसी भी मोटरसाइकिल के पिछले हिस्से में पिछले चक्के की जगह पर लगाया जा सकता है। मनसुखभाई के इस ‘सुपर हल’ को उस इलाके में बुलेट सांटी Bullet Santi 2 (2) (2)(खेत की मिट्टी को मुलायम और समतल करने वाले हल का स्थानीय नाम ) के नाम से लोग जानते हैं। इस हल के जरिए खेती से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां मसलन बुवाई, अंतर-संवर्धन, कीटनाशकों या किसी अन्य चीज के छिड़काव के लिए किया जा सकता है।

अपने इस बुलेट सांटी के बारे में बताते हुए मनसुखभाई कहते हैं ” बुलैट सांटी से किसानों को जबरदस्त फायदा हुआ। इस आविष्कार से किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली क्योंकि इसके बाद वो खेत जोतने के लिए मजदूरों या बैलों की चिंता से मुक्त हो गए।

बुलेट शांटी ने भारत और अमेरिका दोनों जगहों पर अपनी प्रौद्योगिकी के लिए पेटेंट हासिल किया बावजुद उसके व्यापक स्तर पर इसको विकसित करने में किसी कंपनी ने दिलचस्पी अब तक नहीं दिखाई है।

कम लागत वाली सांटी कृषि कार्य के लिए बेहद उपयोगी उपकरण है। एक एकड़ खेत की जुताई दो लीटर डीजल के इस्तेमाल से इस उपकरण के जरिए महज आधे घंटे में हो जाती है। इसके जरिए एक एकड़ खेत से खर पतवार हटाने में मात्र 8 रूपए खर्च होते हैं। ऐसे किसान जो कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर नहीं खरीद सकते हैं उनके लिए इसकी कम लागत को देखते हुए बहुत ही उपयोगी उपकरण है। इस उपकरण की सबसे बड़ी खासियत ये है कि एक बार इसका कृषि उपयोग समाप्त हो जाने के बाद इसको सामान्य मोटरसाइकिल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बहुउद्देशीय कृषि उपकरण सांटी की कीमत है मात्र 38,000 रूपए।

किराये के एक छोटे से दुकान से शुरू हुआ मनसुखभाई का ये सफर आज एक बड़े वर्कशॉप में तब्दील हो चुका है। मनसुखभाई बताते हैं “मेरा वर्कशॉप अच्छा चल रहा है। हाल ही में ग्रासरूट इन्नोवेंशन अगमेंटेशन नेटवर्क और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने अनुदान के जरिए वर्कशॉप के विस्तार करने और उपकरण खरीदने में मेरी मदद की। हालांकि कुशल कारीगरों की कमी मेरे व्यापार के लिए एक बड़ी बाधा है।”  किसानों को कृषि उपकरण बेचने के अलावा मनसुखभाई किसानों के पास मौजुद उपकरणों के मरम्मत और अच्छे रखरखाव में भी उनकी मदद करते हैं। इसके अलावा इन्होंने कई अन्य उपकरणों का निर्माण भी किया है जो किसानों के लिए वाकई मददगार साबित हो रहे हैं।

मनसुखभाई ने कुशल एवं सस्ती छिड़काव उपकरण बनाया है जिसको साइकिल पर लगा कर इस्तेमाल किया जाता है। ये छिड़काव उपकरण इस्तेमाल करने में आसान है क्योंकि इसकी उंचाई उपर नीचे की जा सकती है। अन्य छिड़काव उपकरण की तुलना में विभिन्न फसलों में उपयोग के दौरान किसानों को ये अधिक स्कोप (लचीलापन) देता है। ट्रेक्टर पर लगने वाले स्पेयर की तुलना में ये स्प्रेयर इस्तेमाल होने के लिए कम जगह घेरता है। एक एकड़ खेत में इसके उपयोग में 45 मिनट का वक्त लगता है जिससे कि लागत भी कम आती है। बुलेट सांटी की तरह ही साइकिल का भी जब छिड़काव में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है तब उसका साइकिल की तरह उपयोग किया जा सकता है। साइकिल को लगा कर स्पेयर की कीमत है 2200 रूपए।

मनसुखभाई ने बुआई और ऊर्वरक छिड़काव के लिए भी एक उपकरण तैयार किया है जिससे अन्य उपलब्ध विकल्पों की तुलना में अधिक कुशलता से औऱ तेजी से बुआई की जा सकती है। तकरीबन 400 बुलेट सांटी बेच चुके मनसुखभाई कहते हैं “इस काम के लिए मुझे हर किसी से प्रशंसा मिली। इससे मुझे आगे और काम करने की प्रेरणा मिली। बुलेट सांटी से मुझे नया व्यापार मिला जिससे मुझे अच्छी आय हुई।”

दक्षिण अफ्रीका में एक प्रदर्शनी में दिखाए जाने के अलावा मनसुखभाई की सांटी ने पुणे में आयोजित भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी बहुतों का ध्यान अपनी ओर खिंचा। मनसुखभाई मिल रही तारीफ और यश को अपने लिए सबसे बड़ा तोहफा मानते हैं।

वर्कश़ॉप शुरू करने से पहले साल में तीस हजार रूपया कमाने वाले मनसुख भाई की आज प्रत्येक महीने की आमदनी दस  बारह हजार रूपए की है। मनसुखभाई अब भी राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के हाथों मिले अवार्ड को अपने जीवन का सबसे यादगार पल मानते हैं। इसलिए मनसुखभाई कृषि कार्यों से जुड़े और भी उपकरणों को तैयार करने पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही मनसुखभाई कुछ और बेहतर उपकरण ले कर सामने आएंगे।

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