सौर ऊर्जा एक वैकल्पिक नवीकरणीय ऊर्जा है जो कम लागत और अपनी उच्च क्षमता की वजह से तेजी से मुख्य धारा का विकल्प बनती जा रही है। सौर ऊर्जा के जरिए कार्य स्थलों एवं घरों के उपयोग के लिए विधुत उत्पादन के साथ साथ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से हम विधुत चालित ड्रायर, कुकर, भट्टी, रेफ्रीजरेटर, और एसी भी चला सकते हैं। कृषि कार्यों में भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी हो रही है जो भारत में परंपरागत तौर पर भारी मात्रा में बिजली की खपत की वजह है।

सौर ऊर्जा तकनीक कृषकीय उपकरणों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। सोलर फोटोवोल्टीक सेल सूर्य से प्राप्त प्रकाश ऊर्जा को सीधे विधुत ऊर्जा में तब्दील करता है। संकेंद्रित सौर ऊर्जा (सीएसपी) प्रणाली रूपांतरण प्रक्रिया के लिए अप्रत्यक्ष विधि का प्रयोग करता है। एसपीवी और सीएसपी के अलावा डाय – सेन्सेटाइज्ड सोलर सेल, ल्युमिन्सिकेंट सोलर कंसेंट्रेटर, बायो हाइब्रिड सोलर सेल, फोटोन इनहैंस्ड थरमाइयोनिक इमिशन सिस्टम जैसी कुछ अन्य नई तकनीक भी हैं। इन सभी उपकरणों का छोटे स्तर पर भी उत्पादन किया जा सकता है; ये आकार में छोटे होते हैं जो इन्हें आसानी से कृषि कार्यों में उपयोग के लायक बनाता है।

सौर खेती 

Solar Farmingसौर खेती में कृषि या खेती के उपकरणों के लिए सौर ऊर्जा जनित विधुत का इस्तेमाल किया जाता है। यह सरल, कम लागत वाली, विश्वसनीय और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने लायक होते हैं। अधिकांश कृषि उपकरण जैसे ट्रैक्टर, सिंचाई प्रणाली, रोटेटर, रोलर, प्लांटर, स्प्रेयर, ब्रॉडकास्ट सीडर आदि या तो बैटरी पर या पेट्रोलियम ईंधन पर काम करते हैं। सौर खेती में बैटरी ऊर्जा को सौर ऊर्जा से स्थांनांतरित कर दिया जाता है ताकि ग्रीड पावर और गैर – नवीनकरणीय स्त्रोतों से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग कम किया जा सके। भारत में सौर ऊर्जा के जरिए इस्तेमाल किए जा रहे कृषि उपकरणों की सूची इस प्रकार है :

सोलर वॉटर पंप प्रणाली –

Solar Water Pumpingसोलर फोटोवोल्टेक वाटर पंप सिस्टम में एक सोलर पैनर, एक ऑन – ऑफ स्वीच, नियंत्रित और ट्रैकिंग प्रणाली और एक मोटर पंप होता है। ये प्रणाली सौर ऊर्जा को विधुत धारा में परिवर्तित करने के लिए अनिवार्य तौर पर एसपीवी सेल का इस्तेमाल करता है। एसपीवी सेल की सारणी क्षमता विभिन्न जल स्त्रोतों जैसे बोरवेल, कुआं, बांध, जलाशयों, नहरों की जरूरतों के मुताबिक दो सौ वॉट से पांच किलो वॉट तक हो सकती है। उपयुक्त सोलर पंप के चुनाव के लिए प्रतिदिन पानी की जरूरत, जल स्त्रोत और उनकी भौगोलिक अवस्थिति जैसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। यद्यपि इसका संचालन अन्य पंप प्रणाली जैसा ही होता है तथापि सौर विकिरण की तीव्रता, स्थान, मौसम आदि के आधार पर अवधि और कितनी मात्रा में पानी खिंचा जाना है , ये भिन्न हो सकता है। एक हजार वॉट क्षमता वाली सौर पंप चालीस हजार लीटर पानी प्रति दिन के हिसाब से दो एकड़ भूमि की सिंचाई कर सकती है। पांच हार्स पॉवर की क्षमता वाली सौर पंप की कीमत तकरीबन 4,39,000 रुपए है। भारत के कुछ राज्यों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अस्सी फीसदी तक सब्सिडी दिया जाता है। कई निर्माता मसलन किर्लोस्कर, स्नेडर इलेक्ट्रिक, टाटा सोलर आदि भारत में कई प्रकार के सोलर पंप बेचते हैं।

सौर पंप में कम बिजली की जरूरत पड़ती है और इस पर कम लागत आती है क्योंकि इसके संचालन के लिए मंहगे डीजल की आवश्यकता नहीं पड़ती है। एक हजार वॉट क्षमता की सौर पंप पर डीजल पंप की तुलना में सालाना तकरीबन 45 हजार रुपये तक की बचत होती है। पर्यावरण पर इसका असर भी तकरीबन न्युनतम है।

सोलर ड्रायर

Solar Dryerसोलर डीहाइड्रेटर या सोलर ड्रायर का इस्तेमाल करके अनाज को मंडी में भेजने से पहले सुखाया जाता है। इन ड्रायर में आम तौर पर ऊर्जा पैदा करने के लिए निष्क्रिय सौर पैनलों का उपयोग किया जाता है। एक बड़े सोलर ड्रायर में आम तौर पर एक शेड के बने होते हैं, जिसमें अनाज को सुखाने के लिए एक रैक और एक सोलर पैनल होता है। एक पंखे से जब शेड के जरिए गर्म हवा चलाया जाता है तब इस पर अनाज सूखते हैं। घरेलु इस्तेमाल के लिए छोटे सोलर ड्रायर पर सब्जी, फल, मसाले आदि जल्दी खराब होने वाले नम प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री जैसे आलू चिप्स, पत्तियों वाली सब्जियां आदि बगैर गंदा किए सुखाए जा सकते हैं। मजबूत परिसंचरण सोलर ड्राइर सोलर कलेक्टर का प्रयोग करती है ताकि हवा का परिसंचरण तेज किया जा सके। इस तरह के ड्राइर में सोलर एयर हीटर, एक इलेक्ट्रीक ब्लोअर, नलिकाओं को जोड़ने वाला, सुखाने के लिए एक चैंबर, हवा के तापमान और उसके बहाव को नियंत्रित करने के लिए एक कंट्रोल प्रणाली लगे होते हैं। इस तरह के ड्रायर का इस्तेमाल उच्च क्षमता वाले उत्पाद को सुखाने के लिए किया जाता है।

नेचुरल कन्वेक्शन सोलर टनल ड्रायर एक और प्रकार है जिसका इस्तेमाल उच्च नमी वाले थोक सामग्रियों को सुखाने के लिए किया जा सकता है। इस तरह के ड्रायर में एक्जोस्ट फैन टनल के अंत में उपरी सीरे पर होता है जिससे नम हवा बाहर फेंका जा सके। ड्रायर के सतह और उपरी हिस्से पर पर्याप्त इन्सुलेशन सुनिश्चित किया जाता है ताकि उष्मा के क्षय को रोका जा सके। भारत में विभिन्न कंपनियां इस तरह के ड्रायर पंद्रह हजार रुपये से बीस हज़ार रुपये के रेंज में उपलब्ध कराते हैं। अन्य सौर उपकरणों की तरह ड्रायर्स पर भी सब्सिडी दिया जाता है।

सौर ग्रीन हाउस

Solar Greenhouseसौर ग्रीन हाउस गर्म करने और इन्सुलेशन प्रदान करने के लिए सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करती है। विशेष सोलर ग्रीन हाउस बादल भरे मौसम के लिए या रात्री में उपयोग करने के लिए ऊर्जा का संचय करके रख सकती है। ठंडे मौसम में अतिरिक्त इन्सुलेशन के लिए इनमें सौर ऊर्जा के संचय के लिए एसपीवी सेल का इस्तेमाल किया जाता है। एक अन्य सामाधान के तहत सालों भर सब्जियों उत्पादन बनाए रखने के लिए ऑफ सीजन के दौरान सौर ऊर्जा के जरिए गर्म किए गए पानी के टंकी का इस्तेमाल उष्मा के संचरण के लिए किया जाता है। सोलर तकनीक के इस्तेमाल से चलाए जाने वाले इस तरह के ग्रीन हाउस लद्दाख में तीस हजार रुपये तक की लागत से बनाए जा सकते हैं।

गर्म मौसम में सौर ग्रीनहाउस का कुछ खास फसलों के लिए आवश्यक एक कूलर जोन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एसपीवी सेल से चलने वाले कुलिंग पंप ग्रीन हाउस के उपर या दोनों किनारे में से किसी एक जगह पर लगाया जा सकता है। ग्रीन हाउस में वेंटिलेशन (संवहन) भी आवश्यक है ताकि सोखने की प्रक्रिया के दौरान आद्रता को कम करने और बाहर से ताज़ी हवा को अंदर लाने की व्यवस्था हो। इस तरह की वेंटिलेशन(संवहन) व्यवस्था के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है। सूरज से प्राप्त प्राकृतिक संवहन और गर्मी का उपयोग करने के लिए सामान्य झरोखे भी एक विकल्प है और सौर ऊर्जा से संचालित एक्जोस्ट फैन एक दूसरा विकल्प।

सौर बिजली की बाड़ 

Solar Fenceसौर ऊर्जा से संचालित बिजली की बाड़ बड़े खेतों या पशुपालकों के बड़े फार्मों के लिए बेहद प्रभावकारी है। इस तरह के बाड़ में एसपीवी यूनिट और 12 वोल्ट की बैटरी जिसका इस्तेमाल ऊर्जा के स्त्रोत के लिए किया जाता है, एक इंनरजाइज़र जो 0.9 सेकेंड से 1.2 सेकेंड के अंतराल में उच्च वोल्टेज के आवेग (8 किलोवाट) उत्पन्न करता है, लगे होते हैं। ये आवेग 10 एम ए का करंट उत्पन्न करता है जो कुछ सेकेंडों के लिए बिजली के झटके दे सकता है। बैटरियों को रेडिमेड फेंस चार्जर की मदद से दुबारा चार्ज किया जा सकता है। बैटरी से चलने वाले सौर बाड़ की लागत प्रति एकड़ 45 हजार से 50 हजार रुपये तक आती है। देश के कुछ अन्य इलाके में स्थानीय उपकरणों के सहारे इसके सस्ते संस्करण भी बनाए जाते है जिसकी कीमत दस हजार रुपये से 25 हज़ार रुपये तक आती है।

सौर ऊर्जा चालित दूध दुहने की मशीन

Solar Milking Machineडीज़ल और बिजली से चलने वाली मशीन की जगह पर सौर ऊर्जा से संचालित गाय की दूध दुहने वाली मशीन एक और अन्वेषण है। इस मशीन को एसपीवी माड्युल से जुड़े बैटरियों से चलाया जाता है। बैटरी बैकअप और सोलर पैनल के साथ इस तरह के मशीन की कीमत सत्तर हज़ार रूपये तक है। इस तरह के मशीनों पर कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में 50 फ़ीसदी तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। ये दूध दुहने वाले मैन्युअल मशीनें हैं जिन्हें सौर ऊर्जा के जरिए या हाथों से भी चलाया जा सकता है।

घास काटने की सौर मशीन & ट्रैक्टर 

सौर ऊर्जा से चलने वाली घास काटने की मशीन कोर्डलैस और रिचार्जेबेल बैटरी के विकल्पों के साथ उपलब्ध है। ये मशीनें जहरीली धुएं का उत्सर्जन नहीं करते हैं चलाने के लिए उनमें बार – बार ईंधन भरने की जरूरत नहीं है। इनको चलाने के लिए सौर-ऊर्जा से संचालित बैटरी चार्जर को केवल कुछ घंटों तक चार्ज करना पड़ता है। डीजल से चलने वाले या बिजली से चलने वाले घास काटने की मशीन को भी सौर ऊर्जा से चलने वाली मशीन में तब्दील किया जा सकता है। Solar Tractors

इसी तरह ट्रैक्टर या बुआई की मशीन भी उपलब्ध है जिसके उपर में सौर पैनल लगे होते हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले ट्रैक्टर बुआई और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी आसानी से कर सकते हैं। इस पर पारंपरिक ट्रैक्टरों के मुकावले कम खर्च आता है। हालांकि ये तकनीक अभी भारत में नई है और कुछ ही जगहों पर पारंपरिक ट्रैक्टरों के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। हो सकते है आने वाले दशक में हम पूरी तरह से सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि उपकरण देख सकें। इलेक्ट्रानिक सेंसर की मदद से मिट्टी की नमी जांचने, वर्षा के निर्धारण और स्थान विशेष के लिए मौसम के आंकड़े जुटाने को भी सौर ऊर्जा के साथ चलाया जा सकता है। इसको दूर से ऑपरेट करने के लिए भी तैयार किया जा सकता है।

सौर कृषि के फायदे

इसलिए सौर खेती न केवल पर्यापरण अनुकूल है बल्कि यह विश्वसनीय और लागत प्रभावी भी है। इनकी बनावट की वजह से इनके रखरखाव का खर्च भी कम है। भारत सरकार भी सौर ऊर्जा से चलने वाली कृषि उपकरणों पर सब्सिडी देकर और इसके लिए किसानों को ऋण उपलब्ध कराकर इसके लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को सौर ऊर्जा के बारे में निर्देश देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। ज़ाहिर है अब समय आ गया है जब भारत की खेती को सौर ऊर्जा के लिए तैयार किया जा सके।

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