संरक्षित चारा निर्माण विधि
 
भूमिका – हरी फसलों से बनाए गए उच्च नमी वाले चारे को जिन्हें सुरक्षित रखा जाता है, को संरक्षित चारा कहते हैं। संरक्षित चारे की उपज किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि संरक्षित चारे को पशुओं (दुग्ध उत्पादक पशु, भेड़, बकरी अन्य पशुधन) को उस वक्त खिलाया जाता है जब किसान के पास उत्तम गुणवत्ता वाले चारे या प्राकृतिक चारा उपलब्ध न हो। कुछ किसान हरी फसलों जैसे मक्के या ज्वार की फसलों की उपज से खास तौर पर संरक्षित चारे को व्यवसायिक तौर पर आय के अन्य विकल्प के रुप में तैयार करते हैं । कोई भी जो दुग्ध उत्पादन, भेढ़ या बकरी पालन जैसे व्यवसाय को शुरू करना चाहता है, उन्हें हरित चारे या संरक्षित चारे की उपज की जानकारी हासिल करनी चाहिए। बकरी या भेढ़ या अन्य किसी भी तरह के पशु पालन व्यवसाय में उच्च आमदनी के लिए हरित चारा या संरक्षित चारा बेहद महत्वपूर्ण है।
Page30_2संरक्षित चारे का उपयोग –
— संरक्षित चारा पोषक खाद्य का बेहतरीन स्त्रोत है
— पशुओं खास तौर पर भेढ़ों की त्वरित वजन वृद्धि में बेहद उपयोगी
— संरक्षित चारे को भोजन के रूप में ग्रहण करने पर गायों के दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी
— गर्मियों के मौसम जब प्राकृतिक चारागाह में जानवरों के चरने की संभावना कम हो जाती है, संरक्षित चारा बहुत उपयोगी साबित होता है
–बकरियों, भेढ़ और दुग्ध उत्पादक पशुओं के लिए चारे के रूप में उपयोग
इस लेख में हम संरक्षित चारा निर्माण की विधि पर चर्चा करेंगे।
भारत में मक्के से संरक्षित चारा निर्माण की विधि लोकप्रिय है और मक्के की शुरूआती चरण में जब कि उसकी पोष्टिक मूल्य सर्वाधिक होता है चारा काट कर अलग कर लिया जाता है।
संरक्षित चारा निर्माण विधि प्रथम चरण – 
सबसे पहले और सबसे जरूरी ये है कि संरक्षित चारे के लिए किस फसल की बुआई करनी है, इसको तय कर लें। इसके लिए फसल की कम अवधि में तैयार होने वाली उन्नत किस्म की फसल का चयन किया जाना चाहिए।
संरक्षित चारा निर्माण विधि द्वितीय चरण –
एक गड्डा खोदने के लिए अपेक्षाकृत ढलवां जमीन का चयन किया जाना चाहिए। ढलवां जमीन में गड्डे की गहराई जमीन के निचले इलाके से उंचाई वाले इलाके  की ओर हो घटते हुए क्रम में हो ताकि गड्डे की आकृति तीरछी बन सके। आमतौर पर गड्डे का आकार और उसकी गहराई संरक्षित चारे की उपलब्धता के आधार पर तय किया जाता है। उदाहरण के लिए, बीस बोरा संरक्षित चारे के लिए हमें 2 क्यूबिक मीटर की गहराई वाला गड्डा खोदना चाहिए और इसके लिए हमें दस मीटर पॉलिथीन और गुड़ का तीस लीटर रस या सीरा की जरूरत होती है।
संरक्षित चारा निर्माण विधि तीसरा चरण – 177
चारा काटने वाली मशीन की मदद से चारा को एक एक इंच टूकड़ों के आकार में काट लीजिए।
संरक्षित चारा निर्माण विधि चौथा चरण – 
कटा हुआ चारा जमीन को न छू सके इसके लिए बनाए गए गड्डे में नीचे से पॉलिथीन लगा दें ताकि गड्डे की जमीन और रखे जाने वाले चारे के बीच में पॉलिथीन हो।
संरक्षित चारा निर्माण विधि पांचवा चरण – 
कटे हुए चारे को को गड्डे में रख कर उसे एक महीन लेयर में गड्डे के अंदर फैला देना चाहिए। इस प्रक्रिया को तब तक दुहराना है जब कि गड्डे का एक तिहाई हिस्सा चारे से भर न जाए।
संरक्षित चारा निर्माण विधि छठा चरण – 
एक लीटर गुड़ के रस या सीरा को तीन लीटर पानी में मिलाकर चारा के उपर फव्वारे के रूप में डाला जाना चाहिए ताकि चारा को संरक्षित किया जा सके।
संरक्षित चारा निर्माण विधि सातवां चरण –
चारे को सड़ने से बचाने के लिए गुड़ के रस या सीरे को गार्डन स्पेयर (फव्वारे) की मदद से पूरे गड्डे में डाला जाना चाहिए। इसकी मदद से चारे में सूक्ष्म जीव पैदा होते हैं जिससे कि चारे का किन्वनीकरण (फर्मेंटशन) तेजी से होता है और इस प्रक्रिया की वजह से चारा सड़ने से बच जाता है।
संरक्षित चारा निर्माण विधि आठवां चरण –
गड्डे में मौजुद चारे को अब पांवों से दबाना चाहिए ताकि उसके बीच मौजुद हवा बाहर आ जाए और उसे फफूंद के हमले से बचाया जा सके। ये पूरी प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जानी चाहिए क्योंकि चारे के बीच अगर जरा सी भी हवा रह गई तो इससे फफूंद पैदा होगा जो चारे को नुकसान पहुंचा सकता है।
संरक्षित चारा निर्माण विधि नौवां चरण – गड्डे में मौजुद चारे को पैरों से दबाने के बाद बनी जगह में गुड़ के रस या सीरे से मिलाकर कुछ और चारा गड्डे में तब तक डाला जाना चाहिए जब तक कि गड्डा पूरी तरह से न भऱ जाए।
संरक्षित चारा निर्माण विधि 10वां चरण – गड्डे में चारा पूरी तरह भर जाने के बाद उसे उपर से पॉलिथीन शीट से डक देना चाहिए ताकि चारा का पानी या किसी भी अन्य चीजों के संपर्क से बचाया जा सके। गड्डे के चारो तरफ या निकास नाले की खुदाई कर दिया जाना चाहिए।
संरक्षित चारा निर्माण विधि 11वां चरण –
किन्वीकरण (फर्मेंटेशन) के जरिए संरक्षण में कई सप्ताह का वक्त लगता है। जब तक चारे की कमी या संकट का दौर न आए तब तक के लिए गड्डे को छोड़ दिया जाना चाहिए। अगर गड्डे के मिट्टी को ठीक से ढंका गया हो और अच्छे तरीके से पॉलिथीन बिछाई गई हो तो संरक्षित चारा कम से दो सालों तक चलता है।
संरक्षित चारा निर्माण 12वां चरण –
संरक्षित चारा का उपयोग करने के लिए, गड्डे को नीचले ढलान पर स्थित मुहाने से खोलना चाहिए और जरूरत के मुताबिक चारा निकालकर उस गड्डे के मुहाने को फिर से उचित प्रकार से ढंक देना चाहिए।
भारत में संरक्षित चारे के व्यवसायिक उत्पादन की बहुत संभावना है। यह बहुत आसान है और कम निवेश में संभव है। इसके लिए चारा उत्पादन के लिए उपजाउ जमीन और चारा काटने वाली एक मशीन (कीमत 20,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक, क्षमता एवं उत्पादन के अनुसार) की आवश्यकता होती है। खुले बाजारा में उम्दा किस्म के संरक्षित चारे की कीमत 25-30 रूपये प्रति किलो तक मिल जाता है। किसानों को बाहर से संरक्षित चारा खरीदने की बजाए खुद ही संरक्षित चारे का निर्माण करना चाहिए।
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