अच्छी खेती के लिए सिर्फ यही जरूरी नहीं है कि मिट्टी उपजाऊ हो, अच्छी खाद, सटीक सिंचाई की व्यवस्था के साथ साथ कुछ और भी तत्व अहम होते हैं जो दूसरे प्रमुख तत्वों की तरह ही खास भूमिका निभाते हैं। इसी कड़ी में नाम आता है उबड़-खाबड़ रहित यानी समतल जमीन की। कुदरती तौर पर समतल जमीन का मिलना लगभग असंभव है, ऐसे में इस तरह की जमीन हासिल करना कृषकों के लिए बेहद कड़ी चुनौती होती है। इसी चुनौती को आसान बनाने में अहम योगदान दिया है किसान रेशम सिंह और कुलदीप सिंह के अन्वेषण ने जिन्होंने स्थानीय खेती के मुताबिक मशीनें ईजाद की और इस क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया। आइये समझते हैं इस तरह की खेती की चुनौतियां और समाधान।

सभी किसान अच्छी तरह समझते हैं कि उबड़-खाबड़ वाले खेत में बुवाई करना बहुत मुश्किल काम होता है। कभी-कभार खेत से अतिरिक्त मिट्टी को निकालना बहुत जरूरी हो जाता है, खासकर तब जब बारिश के बाद सतह पर मिट्टी जमा हो जाती है। रेशम सिंह और कुलदीप सिंह ने स्वतंत्र रुप से ऐसी ही मशीन का विकास किया, जो न केवल अतिरिक्त मिट्टी को काट कर निकालता है, समतल करता है बल्कि उसे ट्रैक्टर के ट्रेलर में जमा भी करता जाता है।

जमीन को चौरस या समतल करने के लिए सह भारक एक पीटीओ संचालित मशीन है जो ट्रैक्टर के पीछे लगा होता है। यह स्क्रैपर ब्लेड की मदद से सतह से बालू उठाने का काम करता है और ट्रैक्टर के ट्रेलर में वाहक पट्टे (कनवेयर) की मदद से जमा कर देता है। इसमे दो वाहक पट्टे होते हैं जो खेत में एक-दूसरे के सामने सीधी रेखा में होते हैं, जो जमीन में एक सीध में होते हैं। पहला वाहक पट्टा या कनवेयर जमीन में 55 डिग्री पर होता है, जबकि दूसरा वाहक पट्टा जमीन की क्षैतिज अवस्था में होता है और जो कि पहले पट्टे की निकासी की जगह स्थित होता है। दूसरा वाहक पट्टा जमीन से छह फीट की ऊंचाई पर स्थित होता है।

बालू को स्क्रैपर ब्लेड की मदद से जमीन से इकट्ठा कर लिया जाता है और पहले वाहक पट्टे (कनवेयर) से जुड़े एंगल की मदद से जमा कर लिया जाता है। इस बालू को वाहक पट्टे की श्रृंखला की मदद से भेज दिया जाता है। यह साथ-साथ आठ फीट की ऊंचाई से चलती ट्रैक्टर में बालू गिराने का काम भी करता रहता है।

56 साल के रेशम सिंह, पंजाब के फरीदकोट के रहनेवाले हैं। उनकी राजस्थान के हनुमानगढ़ में कृषि उपकरणों और मशीनरी की वर्कशॉप है जहां वो अपने पिता के निधन के बाद बस गए थे। दसवीं की पढ़ाई के बाद उन्होंने आईटीआई में दाखिला लिया लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। घर चलाने के लिए उन्होंने राजमिस्त्री का काम शुरू किया, कुछ दिनों तक कविता लिखने का भी काम किया। अंत में मैकेनिक और रचनाकार के तौर पर स्थापित हो गए। घर में पत्नी के अलावा दो बेटा और एक बेटी है। उन्होंने सोयल स्क्रैपर और लोडर बनाने से पहले शीट्स और रॉड्स के लिए कटर और ब्लेंडिंग मशीन ईजाद की थी। इसके लिए उन्हें साल 2006 में गणतंत्र दिवस के मौके पर जिले के कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया।  scrapper 2

कुछ इसी तरह का खास योगदान कुलदीप सिंह का भी रहा है जो पंजाब के मानसा के रहने वाले हैं। कुलदीप सिंह का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। बड़ा होने पर कुशल मैकेनिक और फेब्रिकेटर की पहचान बनाई। हालांकि वो महज दसवीं तक ही पढ़े हैं लेकिन उनका तकनीक और उसके पीछे के विज्ञान की बहुत अच्छी समझ है। बचपन से ही उन्हें पढ़ाई से कोई लगाव नहीं था और लेकिन मशीनों को लेकर खास लगाव जरूर था। 1980 के दशक के शुरुआत में उनके परिवार ने एक मिश्रित कटाई मशीन की जरूरत महसूस की, लेकिन काफी महंगा होने की वजह से वो उनकी पहुंच से बहुत दूर था। इस समस्या को उन्होंने एक चुनौती की तरह लिया और मिश्रित कटाई मशीन ईजाद कर ली। कुछ कमाने के लिए इस मशीन को वो दूसरे को किराये पर देने लगे। रेशम सिंह की ही तरह कुलदीप सिंह के भी परिवार में पत्नी, दो बेटा और एक बेटी है।

हनुमानगढ़ में, बरसात के दिनों में खेत में काफी मात्रा में मिट्टी जमा हो जाती है, जिससे खेत की ऊंचाई बढ़ जाती है। मिट्टी में आए इस तरह के बदलाव की वजह से कैनाल का पानी मिलने में दिक्कत होने लगती है। इसलिए मिट्टी की कटाई-छंटाई की जरूरत पैदा हो जाती है। मिट्टी की मात्रा के हिसाब से इस कार्य को एक ट्रैक्टर की सहायता से किया जाता है जिसमे लैंड स्क्रैपर या जेसीबी लगी होती है। अपने क्षेत्र में रेशम सिंह नई और मौलिक मशीन बनाने के लिए मशहूर थे। साल 2009 में उन्होंने एक किसान ने उनसे लैंड लेवलिंग मशीन बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने चुनौती स्वीकार की और कुछ ही महीने में उनके मनमाफिक मशीन बनाकर दे दी।

वहीं, दूसरी ओर कुलदीप सिंह उबड़-खाबड़ जमीन होने के चलते 40 बीघा जमीन में बुवाई नहीं कर सके। उन्होंने ट्रैक्टर की मदद से जमीन को समतल करने की कोशिश की लेकिन ज्यादा खर्च होने के बावजूद संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। मजदूर से जमीन को समतल बनाने का काम तो और भी महंगा साबित होता। ऐसे हालात में वो सोचने के लिए मजबूर हो गए और लैंड लेवलिंग यानी खेत को समतल बनाने वाली मशीन विकसित की। उन्होंने इसके लिए साल2005 में काम करना शुरू किया जो साल 2009 में जाकर पूरा हुआ।

कुलदीप सिंह और रेशम सिंह की मशीन की अगर तुलना करें तो इसमे हम समानता पाते हैं। लैंड लेवलर कम लोडर मशीन यानी जमीन को समतल करने सह लोड करनेवाली मशीन है जो ट्रैक्टर पीटीओ संचालित मशीन है।

रेशम सिंह की मशीन और कुलदीप सिंह की मशीन

  • स्क्रैपर ब्लेड की मदद से मिट्टी की कटाई,   – स्क्रैपर ब्लेड की मदद से मिट्टी की कटाई, कनवेयर की मदद से मिट्टी या बालू को जमा कर ट्रैक्टर में रखना
  • कनवेयर की मदद से मिट्टी या बालू को जमा कर ट्रैक्टर में जमा करना
  • यह एक वक्त में 4 ईंच गहरी खुदाई कर सकता है – यह एक वक्त में 3 ईंच तक गहरी खुदाई कर सकता है
  • यह डेढ़ मिनट में 11गुना 6 गुना 2.25 फीट आकार के ट्रेलर को भर सकता है – यह एक मिनट में 11गुना 6 गुना 2.25 फीट आकार के ट्रेलर को भर सकता है

(मिट्टी कम कड़ा होने पर एक मिनट से कम वक्त लगता है)-(मिट्टी कम कड़ा होने पर एक मिनट से कम वक्त लगता है)

  • 50 एचपी या अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर में काम कर सकता ह – इसे भी किसी ट्रैक्टर से जोड़ा जा सकता है
  • एक घंटा में पांच से छह लीटर डीजल की खपत- एक घंटा में पांच से सात लीटर डीजल की खपत
  • मशीन से 4 फीट की चौड़ाई में खुदाई, साढ़े आठ फीट की ऊंचाई से मिट्टी गिराना- इससे 3 फीट चौड़ाई तक खुदाई, 8 फीट की ऊंचाई से मिट्टी गिराना संभव

नोट- यह दावा किया जाता है कि दोनों मशीन से औसतन एक दिन में एक बीघा (5 एकड़) जमीन को समतल किया जा सकता है।

मशीन की तकनीक-

  • संवाहक पट्टिका (कनवेयर) में एक जोड़ा चेन होता है, यह एक वक्त में चार ईंच गहरी कटाई कर सकता है और 11 scrapper 1गुना, 6 गुना और 2.25 फीट के आकार के ट्रेलर को महज दो मिनट में भर सकता है।
  • 50 एचपी और उससे अधिक की क्षमता वाले किसी भी ट्रैक्टर से इसे जोड़ा जा सकता है।
  • इस मशीन का इस्तेमाल करने के दौरान ट्रैक्टर प्रति घंटा पांच से छह लीटर डीजल की खपत करता है।
  • मशीन में 4 ईंच तक की गहराई तक काटने की क्षमता और साढ़े आठ फीट की ऊंचाई से बालू गिराने की क्षमता है।

मशीन से जुड़ी मुख्य बातें-

  • कुछ क्षेत्रों में इस मशीन से बड़ी संभावनाएं हैं जैसे कि कनाल के पानी के लिए मिट्टी की कटाई, साथ ही सड़क और आवास निर्माण।
  • एक अनुमान के मुताबिक यह मशीन एक दिन में एक बीघा (5 से 8 एकड़) जमीन से 150 ट्रेलर बालू हटा कर समतल कर सकता है।
  • इसे किराये पर भी लगाया जा सकता है, इसके लिए दो वर्ग फीट गहरी खुदाई प्रति दो रुपये के हिसाब से दर तय की जा सकती है। जो बालू काट कर निकाला गया है उसे प्रति ट्रेलर 250 से 300 रुपये की दर से बेचा जा सकता है।
  • मशीन की कीमत- 1,50,000 रुपये (एक्स-फैक्ट्री, पैकेजिंग)। कीमत में परिवहन खर्च और कर इत्यादि शामिल नहीं।
  • आपूर्ति की अवधि- एक महीना
  • आईपीआर(IPR) की स्थिति- इंडियन पेटेंट आवेदन (158/DEL/2012)

पुरस्कार

एनआईएफ ने अन्वेषक को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के सातवें बाइनियल अवॉर्ड फंक्शन में राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया है। रेशम सिंह ने हनुमानगढ़ और उसके आसपास के इलाके में 40 मशीनें बेची और जबकि कुलदीप सिंह ने पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में 200 मशीनें बेचने का दावा किया है।

 

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