आपके भोजन का उत्पादन करने वाले किसान को मिलकर आप अगर धन्यवाद करना चाहें तो क्या होगा?  कल तक की व्यवस्था में तो ये संभव नहीं था लेकिन दो उद्यमी भाइयों की मदद से ये संभव हो पाया है।

Balkal Singh-3-500x375सूबेदार मेजर बलकार सिंह संधू ने 32 साल तक आर्मी में काम किया और साल 2008 में सेना से रिटायर हो गए। जैसे ही वो सेना से सेवानिवृत्त हुए वो वापस अमृतसर लौट आए और अपने पैतृक जमीन पर खेती शुरू कर दी।

उनका परिवार परंपरागत तौर पर खेती से जुड़ा हुआ था और एक किसान का बेटे होने के नाते वो हमेशा अपनी जड़ों से वापस जुड़ना चाहते थे। 40 एकड़ की जमीन का मालिक होने के नाते सिंह परिवार अच्छी स्थिति में थे, धनी थे। हालांकि बलकार सिंह ने यह महसूस किया कि उनके इलाके में छोटे किसान बिचौलियों के द्वारा ठगे जा रहे हैं। खेती से जुड़े कुछ परिवार तो तीन पीढ़ियों से अपना ऋण नहीं चुका पा रहे थे और कुछ ने तो खुदकुशी तक कर ली। बलकार सिंह ने किसानों के अधिकार के लिए आवाज उठाना शुरू किया और वो अमृतसर और तरनतारन किसान संघर्ष कमेटी के क्षेत्रीय प्रमुख चुन लिए गए।

पवित्तर सिंह और हरजाप बने रोल मॉडल

उनका बेटा पवित्तर सिंह जो कि एक काबिल सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उस दौरान विदेश में काम कर रहे थे और बाद में उन्होंने बेल्जियम और नीदरलैंड में परिवार के बिजनेस रेस्त्रां को चुना। वो भारत में कृषि की चुनौतियों के बारे में अच्छी तरह से परिचित थे क्योंकि अक्सर वो अपने पिता के अनुभव के बारे में अपनी मां से सुना करते थे और उनका लालन-पालन भी किसान परिवार में हुआ था।

पवित्तर सिंह की जिंदगी में क्रांतिकारी बदलाव साल 2014 में तब आया जब उनके पिता के नेतृत्व में चल रहे एक तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे ट्रैक पर बैठे एक किसान की मौत हो गई। किसानों की दशा के बारे में सुनकर और पिता के साथ जुड़ने की इच्छा के साथ पवित्तर ने भारत लौटने का फैसला कर लिया। उनके कजन हरजाप सिंह ने भी जो विदेश जाने से पहले छह साल तक खेती से जुड़े हुए थे, ने भी उनके साथ जुड़ने का फैसला किया। उसके बाद करीब डेढ़ साल तक दोनों ने पूरे देश का दौरा किया और किसानों की समस्याओं और उनके कारणों को जानने की कोशिश की। उसके बाद दोनों एक निष्कर्ष पर पहुंचे और पाया कि इसके पीछे मुख्य रुप से दो वजह जिम्मेदार है।  पहला, किसान अपनी फसल की कीमत खुद तय नहीं कर सकते क्योंकि उनका उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क नहीं है। दूसरा, भंडारण की समस्या के चलते उन्हें अपनी फसलों को बिचौलिये या एजेंट को बेचना पड़ता है।

किसान मित्रयानी farmer friend

इन चुनौतियों के समाधान के लिए योजना तैयार की गई, पवित्तर और हरजाप दोनों किसानों के लिए एक समाधान लेकर आए और उसका नाम दिया, ‘किसान मित्र’ यानी farmer friend

दोनों भाइयों ने 20 लोगों की एक मजबूत टीम बनाई जो छोटे गांवों में गए और पंचायत से अपनी योजना के बारे में बात की, जिसमे किसानों को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ना शामिल था। जैसे ही पंचायत ने सहमति जताई, वैसै ही उन्होंने इस बात घोषणा कर दी कि इस योजना में किसान खुद को शामिल कर सकते हैं। हरजाप और पवित्तर ने किसानों को जोड़ने और उनके सवालों के समाधान के लिए हरियाणा और पंजाब में दो किसान सेवा केंद्र भी बनाया जो किसानों के लिए सहायता केंद्र का काम करते थे। दो साल के दौरान किसान मित्र के साथ करीब तीस हजार किसान जुड़ चुके थे।

अपने नेटवर्क यानी प्रसार से उत्साहित पवित्तर और हरजाप ने अगस्त 2016 में किसानों और उपभोक्ताओं को सीधे जोड़ने के लिए अपना आधिकारिक वेबसाइट शुरू किया। संस्थापक भी सीधे रेस्त्रां और होटल मालिकों से जुड़ गए ताकि किसानों से सीधे माल को प्राप्त किया जा सके। वहीं, आज 350 से अधिक रेस्त्रां और होटल्स और ढाई हजार से ज्यादा लोग अनाज, मुर्गियां, दूध उत्पाद और सब्जियां किसान मित्र के जरिए सीधे किसानों से प्राप्त कर रहे हैं।

किसान और उपभोक्ता दोनों विजेता

इसमे दोनों ही तरफ के लोगों के लिए जीत की स्थिति है। इसके तहत किसान ऐसा कुछ भी नहीं बेचते हैं जिससे उनके उपभोक्ताओं को कोई नुकसान हो और साथ ही उपभोक्ता को सस्ते दर पर सामान मिल जाता है। इसके अलावा, किसान को सही कीमत मिल जाती है और साथ ही मालिक होने का अहसास भी होता है, क्योंकि अब वो अपनी फसल की कीमत तय कर सकता है। पवित्तर के मुताबिक,किसानों की समस्या के समाधान के लिए ऋण माफी और मिट्टी की मुफ्त जांच जैसी सुविधाओं का प्रस्ताव देना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘वो अपने ऋण को चुकता करने के लिए कड़ी मेहनत करने को तैयार हैं, उन्हें सिर्फ ये चाहिए कि उनके उत्पाद की सही कीमत मिले। आखिर किसान दिन-ब-दिन क्यों गरीब होता जा रहा है जबकि उसके द्वारा पैदा किया गया सामान बाजार में लगातार महंगा होता जा रहा है ? यह समझना इतना कठिन क्यों है कि यही वो समय है जब हमें बिचौलियों को निकाल बाहर करना चाहिए जो इस गलत अंतर के लिए जिम्मेदार है।’

किसान मित्र देश के 20 से अधिक शहरों में संचालित 

किसान का मित्र बनने के लिए आपको वेबसाइट पर लॉग इन करना पड़ेगा और अपनी जगह के किसानों को खोजना होगा।Online veg उनका नाम और संपर्क नंबर का वहां जिक्र किया गया है ताकि आप अपनी जरूरत के लिए उनसे संपर्क कर सकें। अगर उन्हें पर्याप्त ऑर्डर मिला तो किसान खुद आपके पास सामान पहुंचा देगा। इस तरह आप किसान से मिल सकते हैं और साथ ही उन्हें धन्यवाद भी दे सकते हैं जो अपने खेतों से आपकी टेबल तक खाना पहुंचाने का काम करते हैं।

info@farmerfriend.in

किसान सेवा केंद्र पंजाब के कपूरथला और हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है। इंटरनेट पर ऑनलाइन किसान मित्र (Farmer Friend) के बारे में खोज कर सकते हैं या फिर बलकार, पवित्तर और हरजाप को info@farmerfriend.in पर लिख सकते हैं।

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