अजमेर

भारतीय प्रबंधन संस्थान कोलकाता से पोस्ट ग्रेजुएट अंकिता कुमावत डेयरी उत्पादक हैं। अंकिता मातृत्व डेयरी और आर्गेनिक फूड कंपनी चलाती हैं। देश के शीर्षस्थ मैनेटमेंट कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद कॉर्पोरेट जगत की आलीशान नौकरी करने की बजाए अपने पैतृक गांव में डेयरी चलाने का फैसला अंकिता के लिए आसान तो नहीं था लेकिन पिता की मदद की चाह से उन्हें ये फैसला लेने में आसानी हुई।

सालों पहले सरकारी महकमे में इंजीनियर रहे उनके पिता ने स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने के बाद डेयरी का व्यापार शुरू किया और अजमेर एवं उसके आस पास के इलाके में शुद्ध एवं मिलावट रहित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के अपने पिता के व्यवसाय के साथ बाद में अंकिता भी जुड़ गईं।

अपने प्रोजेक्ट के बारे में अंकिता कहती हैं, “पहले हम अपने काउंटर से बेचते थे, लेकिन अब हमने होम डिलीवरी शुरू कर दिया है। हम आर्गेनिक फल, सब्जी, मसाला और शहद भी लोगों को उपलब्ध कराते हैं”।

अपने इस सफर के बारे में अंकिता आगे बताती हैं, “पहले मैं कर्मचारी थी, लेकिन अब मैं नियोक्ता हूं। ये सफर मुश्किल भरा रहा। इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा आमदनी नहीं है। इस डेयरी को चलाने के लिए मुझे अपने पॉकेट से कई बार पैसे निकालने पड़े क्योंकि शुरू में आमदनी बहुत कम थी”।

वो कहती हैं, “हमारे समाज की सोच और जीवनशैली बदल रही है। क्रय शक्ति भी बढ़ चुकी है। हम जब कभी आर्गेनिक solar-plant-500x375उत्पाद की बात करते तो लोग समझते थे कि कोई पिछड़ा हुआ उत्पाद है, जबकि आज कल बाजार में मिलावटी चीजों की भरमार है। ये सभी विक्रेताओं की जिम्मेदारी है कि वो ये सुनिश्चित करें कि लोगों को वो शुद्ध गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो और हमारा लक्ष्य भी लोगों को मिलावट रहित उत्पाद उपलब्ध कराना है”।

लैंगिक समानता के सवाल पर अंकिता कहती हैं, “दुनिया में कोई ऐसा काम नहीं है जो महिलाएं नहीं कर सकती हैं। हम उस समाज से आते हैं जहां महिलाएं ओलंपिक में पदक जीत रही हैं और पुरूष सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। कोई लक्ष्य प्राप्त करने के लिए बस आपको खुद पर भरोसा होना चाहिए”।

नौकरियों में हाल के दिनों के ट्रेंड और पलायन के मुद्दे पर अंकिता कहती हैं, “ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे किसान शहरों की ankita-with-cattle-500x375ओर रूख कर रहे हैं, अपने खेतों से पलायन कर शहरों में नौकरी खोज रहे हैं। लेकिन मेरे मामले में ये बिल्कुल उलटा है। हमें खेती के उन्नत तरीकों का प्रयोग, कीटनाशकों का कम उपयोग, और जमीन को कम नुकसान पहुंचाना चाहिए। अपने उज्जवल भविष्य को लेकर मैं आशान्वित हूं क्योंकि लोग भोजन करना नहीं छोड़ सकते। कृषि और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े बड़े उद्यमी आ रहे हैं। कृषि उद्यम में प्रवेश के लिए ये सर्वोत्तम समय है जहां भारतीय युवाओं का भविष्य उज्जवल है”।

अपनी प्रेऱणा के बारे में अंकिता कहती हैं, “ऐसी लोकोक्ति है कि एक सफल व्यापारी होने के लिए आपको एक हजार दिनों तक कठिन श्रम करना होता है। मैंने ये सफर मुस्काराते हुए पुरा किया है इसलिए सफलता तो मुझे मिलेगी ही”।

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