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किसानों के लिए बड़ी सौगात: इफको ने डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) खाद के दाम घटाए
11 months ago

किसानों के लिए बड़ी सौगात: इफको ने डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) खाद के दाम घटाए

1600/- रु प्रति टन कम की कीमत, हर बोरे पर 85 रु  दाम घटे , घटी कीमत तत्काल प्रभाव से लागू

किसानों को एक बड़ी सौगात देते हुए फर्टीलाइज़र की सबसे बड़ी सहकारी कंपनी इफको ने डीएपी और एनपीके उर्वरकों के दाम करने का फैसला किया है। इफको ने प्रति टन 1600 रुपये दाम करने का फैसला किया है। इफको के इस फैसले से किसानों को इन उर्वरकों के हर बोरे पर आज से ही 85 रुपये का फायदा होगा।  कीमत कम करने का फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। अपने स्थापना के पचासवें साल में प्रवेश कर रही इफको की ओर से देश के किसानों को ये तोहफा है। इस साल 3 नवंबर 2016 को इफको अपनी स्थापना के पचासवें साल में प्रवेश कर रही है। 3 नवंबर 2017 को इफको अपनी स्थापना के पचास वर्ष पूरे कर लेगी।DAP 2

इफको के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ यू एस अवस्थी ने नई दिल्ली में आयोजित इफको की 45 वीं वार्षिक आम बैठक में उर्वरकों की कीमत कम करने संबंधी  घोषणा की। डॉ अवस्थी ने इस मौके पर कहा कि ये एक प्रकार से देश के किसानों के लिए इफको की तरफ एक तोहफा  है। किसानों के लाभ के लिए उर्वरकों के मूल्य में ये अब तक सबसे बड़ी कटौती में से एक है। भारत सरकार की महत्वपूर्ण डिजिटल इंडिया अभियान को समर्थन करते हुए इफको ने लगातार दूसरे साल 76 करोड़ रुपये के लाभांश का हस्तांतरण अपने 36 हजार सहकारी समितियों को ऑन लाइन बैंकिंग के जरिए किया।

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घर ही नहीं बैंक भी हैं बिना दरबाजे के … एक गांव ऐसा भी !

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बीते दिनों महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले का शनि शिंगनापुर गांव राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए आंदोलन की वजह से चर्चा में रहा। दरअसल इस गांव की एक और खासियत है। अपने इष्ट शनि देव की वजह से प्रसिद्ध इस गांव की एक और खासियत देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर खिंचती है। करीब 5 हज़ार की आबादी वाले इस गांव में लोग घरों में दरबाजे नहीं लगाते। घरों में दरबाजे का चौखट तो होता है लेकिन फाटक नहीं होता। घरों में ही नहीं बल्कि गांव में मौजुद बैंक भी बगैर दरबाजे के ही हैं। है न चौंकाने वाली बात। दरअसल गांव वालों को चोरी होने का भय नहीं सताता। लिहाज़ा घरों में दरबाजे ही नहीं लगाते।

क्या गांववासियों को चोर उचक्कों का डर नहीं सताता ? गांव में रहने वाली जयश्री गाडे बताती हैं “सालों पहले शनिदेव भक्तों के सपने में आए और कहा, तुम लोगों को अपने घरों में दरवाजे लगाने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा। इसलिए हमलोगों के घरों में दरबाजा नहीं है”।

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साल 2011 में यूको बैंक ने शनिशिंगनापुर की शाखा की शुरूआत तो की लेकिन गांव वालों की इस विश्वास और भरोसे से लबरेज परंपरा का सम्मान करते हुए अपनी इस शाखा में उन्होंने तालों से परहेज ही किया। जानवरों को अंदर आने से रोकने के लिए बैंक में शीशे का फाटक तो है लेकिन दरबाजे नहीं है और न ही ताला। देश भर में अपनी तरह का ये अनुठा बैंक है। बैंक में तकरीबन चार हजार लोगों के खाते हैं।

गांव की पहचान शनिदेव की वजह से है। गांव के बीचों बीच तकरीबन पांच फीट लंबे काले रंग का एक चट्टान बगैर छत के एक प्लेटफार्म पर खड़ा है… यही प्रतिमा हजारों गांव वासियों की शक्ति का स्त्रोत हैं। आज शनिदेव का यह मंदिर अकूत धन संपत्ति वाले एक ट्रस्ट में तब्दील हो चुका है। लेकिन आज भी समुचे गांव की तरह इस मंदिर में भी कोई दरबाजा नहीं है।

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मंदिर के विदेशी मुद्रा खंड में काम करने वाले कैशियर अनिल डारनडाले अपनी इस आस्था के बारे में बताते हैं…” हमारा मानना है कि अगर कोई व्यक्ति कुछ चुराता है या किसी तरह की कोई बेइमानी करता है तो उस पर साढ़े सती का प्रकोप गिरता है। साढ़े सती मतलब दुर्भाग्य के साढ़े सात साल। उसके घर में कुछ न कुछ बुरा होता है। परिवार कोर्ट मुकदमें में फंसा जाता है, या दुर्घटना का शिकार हो जाता है। किसी की मौत हो जाती है या उसके व्यापार में उसे भारी घाटे का सामना करना पड़ता है। अनिल कहते हैं कि एक बार उनके चचेरे भाई ने लकड़ी का दरबाजा लगवाया था अगले ही दिन उसका कार एक्सिडेंट हुआ।

 

सदियों से इस गांव में चोरी डकैती छिनैती जैसा कोई वाकया नहीं हुआ है लेकिन बीते कुछ सालों गांव के लोग दबी जुबान में ही सही लेकिन दरबाजा, ताला औऱ घरों की सुरक्षा को लेकर शुरूआती स्तर पर ही सही बदलाव की बात करने लगे हैं। पिछले कुछ सालों में एक आध वारदात के बाद लोग घरों की सुरक्षा को लेकर दबी जुबान में ही सही बदलाव के संकेत तो देते हैं लेकिन अब भी शनिदेव के प्रति आस्था अटूट है और पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को एक झटके में छोड़ने को तैयार नहीं दिखते।

भौतिकवाद की अंधी दौड़ में लगी दुनिया के लिए शनि शिंगनापुर का ये प्रचलन ज़ाहिर है एक बहुत बड़ा संदेश है।

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उर्वरकों का उत्पादन और विपणन करने वाली देश की प्रतिष्ठि‍त सहकारी संस्था इफको ने जापान की मित्सुबिशी कॉरपोरेशन के साथ मिलकर ‘इफको-एम सी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक संयुक्त कंपनी बनाने का करार किया है. संस्था अपने इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया कैंपेन के बढ़ते कदम के तौर पर देख रही है. Read more

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