कंपोस्ट ही एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण पूरक पोषण है जो आप अपने बगीचे की मिट्टी को दे सकते हैं।

वनस्पतियों की वृद्धि को तेज करने और मिट्टी की जीवन शक्ति को पुर्नस्थापित करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर वनस्पति से निर्मित खाद को सरल तरीके से मिट्टी में डालना ही कंपोस्टिंग कहलाता है। इसको बनाने में कोई खर्च नहीं आता है, आसानी से बनाया जा सकता है और पर्यावरण के लिए भी अच्छा है।  Compost

कंपोस्ट के फायदे 

मिट्टी अनुकूलक (कंडीशनर) : कंपोस्ट से आप लॉन और बगीचे के लिए पोषण से भरपूर मिट्टी तैयार करते हैं जिससे आपके पौधों को पोषण मिलता है और मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।

रसोई घर के कचरों का पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग)

कंपोस्ट तैयार करने से घर से निकलने वाले कूड़ों का कम से कम तीस फीसदी हिस्सा दुबारा उपयोग में आ जाता है। 2

मिट्टी के लिए उपयोगी जीवाणुओं की प्रचुरता कंपोस्ट में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु मिट्टी में आक्सीजन की मात्रा बढ़ाने, पौधों के उपयोग के लिए मिट्टी में मौजुद कार्बनिक पदार्थ को तोड़ने और पौधों को रोगाणु मुक्त करने में मदद करते हैं।

पर्यावरण के लिए बेहतर : कंपोस्ट रासायनिक खाद के लिए एक प्राकृतिक विकल्प उपलब्ध कराता है।

ठोस अपशिष्ट भराव क्षेत्र को कम करता है  उत्तरी अमेरिका में मौजुद अधिकांश ठोस अपशिष्ट(कचरा) भराव क्षेत्र तेजी से भर रहे हैं, इनमें से कई पहले ही बंद हो चुके हैं। ठोस अपशिष्ट (कचरा) भराव क्षेत्र में एकत्रित कचरा का एक तिहाई हिस्सा कंपोस्ट किए जा सकने वाली सामग्रियों से भरी होती हैं।

किससे बनाए कंपोस्ट खाद –  

           सामग्री       कार्बन/नाइट्रोजन        सूचना
 टेबल स्क्रैप      नाइट्रोजन  सूखे कार्बन सामग्री से मिलाएं
फल & सब्जी जनित कचरा      नाइट्रोजन  सूखे कार्बन सामग्री से मिलाएं
अंडे के छिलके      न्यूट्रल पूरी तरह कूचलने पर ही उपयोगी
पत्तियां      कार्बन पत्ता पेड़ से गिरने के बाद तेजी से विघटित होता है
घास की कतरन     नाइट्रोजन पतली परतों में जोड़ें ताकि वो झुरमुटों में न मिल सकें
बगीचे के पौधे      —- रोगाणु मुक्त पौधों का ही उपयोग करें
बगीचे और लॉन के खरपतवार नाइट्रोजन ऐसे खरपतवार का उपयोग करें जो बीज के लिए नहीं गए
झाड़ियों की छंटाई कार्बन झाड़ियों की छंटाई से मिली लकड़ी धीरे धीरे विघटित होतीं हैं
पुआल या घास कार्बन पुआल सर्वोत्तम है, बीज वाली घास कम आदर्श है
संकूटन की हरी पत्तियां ( कंफ्रे) नाइट्रोजन उत्कृष्ट कंपोस्ट खाद उत्प्रेरक
चीड़ की पत्तियां कार्बन अम्लीय; न ज्यादा और न ही कम उपयोग करें
फुल, पत्तियां नाइट्रोजन किसी भी लंबी टहनी की छंटनी कीजिए
समुद्री शैवाल & समुद्री घास की राख नाइट्रोजन पतली परत में लगाए जाते हैं, खनिजों का पता लगाने के लिए अच्छा स्त्रोत
लकड़ी की राख कार्बन साफ सुथरी लकड़ी के राख का इस्तेमाल करना चाहिए। हल्के हाथों से छिड़काव किया जाए।
मूर्गी का अपशिष्ट नाइट्रोजन उत्कृष्ट कंपोस्ट उत्प्रेरक
पिसी हुई कॉफी नाइट्रोजन फिल्टर को भी शामिल किया जा सकता है
चाय की पत्तियां नाइट्रोजन खुली या बैग में
अखबार कार्बन चमकदार कागज़ और रंगीन स्याही से बचें
कटे हुए कागज़ कार्बन चमकदार कागज़ और रंगीन स्याही से बचें
कार्ड बोर्ड कार्बन चूरा बना कर बिखेर दें
मक्का, मक्के का डंठल कार्बन देरी से विघटित होने वाला, अच्छा होगा अगर छोटे छोटे टुकड़े बना दें
सूखी बत्ती कार्बन प्राकृतिक रेशे का हो तो सबसे अच्छा
चीरी हुई लकड़ी का छर्रा कार्बन उच्च कार्बन स्तर, परत दर परत डालें

 

आप अपने बगीचे की मिट्टी को भी अपने कंपोस्ट में डाल सकते हैं। मिट्टी की एक परत किसी भी तरह की दुर्गंध आने से बचाएगी, मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणु कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया को तीव्र करेंगे।

Compost bin

Compost bin

मांस, हड्डी या मछलियों के बचे हुए टुकड़े (वे कीटों को आकर्षित करेंगें), बारहमासी खरपतवार (इनको कंपोस्ट के साथ फैलाया जा सकता है) और रूग्न पौधों को कंपोस्ट न करें। खाद्यान्न फसलों उपयोग किए जाने वाले कंपोस्ट में पशुओं के अपशिष्ट को शामिल न करें। केले के छिलके, आड़ु के छिलके और नारंगी के छिलके में कीटनाशकों के अंश हो सकते हैं, लिहाज़ा इनको कंपोस्ट से बाहर रखना चाहिए। काले अखरोट के पत्तों को कपोस्ट नहीं किया जाना चाहिए। लकड़ी के बुरादों को कंपोस्ट में दिया जा सकता है लेकिन उन्हें गट्ठर बनाने से बचाने के लिए उन्हें या तो अच्छे से मिला दिया जाना चाहिए या फिर हल्के हल्के से उन्हें छिड़क देना चाहिए। लकड़ी के बुरादे साफ हों, इसको अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए लेकिन आरे से या लकड़ी के चिरने वाले औज़ार में किसी तरह का तेल या ग्रीस लगा हुआ न हो।

रसोई घर से निकलने वाले अपशिष्ट को रखन  के लिए सिंक के नीचे एक ढक्कन लगा हुआ एक कंटेनर रखें। एयर फिल्टर या चीनी मिट्टी के मॉडल के साथ स्टेनलेस स्टील की कंपोस्ट बाल्टी के उपयोग करें। अगर कभी कभी आने वाली बदबू को बर्दाश्त कर सकते हैं तो एक पुरानी आइसक्रीम की बाल्टी का उपयोग करें। बाल्टी में डालने से पहले किसी भी तरह के बड़े टुकड़े को काट काट कर छोटा कर लें। कंटेनर के भर जाने के बाद अपने कंपोस्ट को बाहर ले जाएं और मिट्टी में मिला दें। 4

यार्ड और बगीचे के अपशिष्ट / कचरे में विघटित होने वाली सामग्री अलग अलग समय पर विघटित होंगे लेकिन अंतत सभी सामग्री विघटित हो जाएंगी। विघटित होने की प्रक्रिया को अगर आप तेज करना चाहते हैं तो बड़े टुकड़ों को छोटे छोटे टुकड़ों में काट दीजिए। पत्तियां और घास के टुकड़े भी कंपोस्ट के लिए सर्वोत्तम होते हैं लेकिन इन्हें बिन में बिखेर कर रखा जाना चाहिए या कंटेनर में सामग्रियों के बीच में या अन्य सामग्री के साथ मिला कर रखना चाहिए। पतली परतों में इन्हें रखने से बचना चाहिए। वो साथ मिल कर हवा के संचरन में अवरोध पैदा करते हैं जिससे कंपोस्ट निर्माण की गति धीमी हो जाती है।

कंपोस्ट कैसे करें 

  1. खाली ज़मीन पर कंपोस्ट का ढेर बनाना शुरू करें – ये कंपोस्ट को कीड़ों और अन्य लाभकारी जीवाणुओं की मदद से मिट्टी में संचारित करता है।
  2. पहले छोटी छोटी टहनियों और घास के तिनकों को कुछ इंच गहराई में बिछाइए। ये बहाव और ढेर में संवहन में मदद करता है।
  3. कंपोस्ट सामग्री को परतों में बिछाएं, एक बार सूखी सामग्री फिर एक बार नम सामग्री। बचा हुआ भोजन, चाय बैग, समुद्र के शैवाल आदि नम सामग्री हैं और तिनके, पत्तियां, लकड़ी का बुरादा, और लकड़ी का राख आदि सूखी सामग्रियां हैं। अगर आपके पास लकड़ी की राख है तो इसे पतली परत में बिखेर दीजिए नहीं तो वो एक साथ जुड़ कर गठ्ठर का रूप ले लेंगी जिनके विघटन में ज्यादा समय लगेगा।
  4. अपशिष्ट खाद को मिलाएं, हरी खाद ( तिपतिया घास, अनाज का भूसा, गेंहू का पुवाल, घास की कतरनें) या नाइट्रोजन का कोई भी स्त्रोत। ये ढेर को कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया को तेज करता है।
  5. कंपोस्ट को आद्र या नम रखिए। बीच बीच में पानी का छिड़काव जरूरी।
  6. कंपोस्ट को किसी भी चीज – लकड़ी, प्लास्टिक शीट, कार्पेट स्क्रैप आदि से ढक कर रखा जाना चाहिए। इससे कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया तेज होती है।
  7. मिलाना – प्रत्येक कुछ सप्ताह में कंपोस्ट के ढेर को कुदाल से मिलाना चाहिए। इससे उस ढेर में हवा का संचरण हो पाता है। कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया के लिए आक्सीजन जरूरी होता है।Process of Composting

अगर एक बार आपके कंपोस्ट का ढेर स्थापित हो जाता है तो नई सामग्रियां उसमें मिलाकर जोड़ी जा सकती है। इसमें ये ध्यान रखा जाना चाहिए कि ढेर पर नई सामग्री की एक नई परत जोड़ने से अच्छा होगा कि उस सामग्री को उस ढेर में अच्छे से मिला दें। कंपोस्ट का मिश्रण बनाने या उसे लगातार मिलाते रहने से कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया तेज होती है।

अगर  आप इसके लिए कोई कंपोस्टर खरीदना चाहते हैं तो इस बात का ध्यान रखें ऐसा कंपोस्टर खरीदें जो घुम सके ताकि कंपोस्ट का मिश्रण आसानी से बनाया जा सके।

कार्बन / नाइट्रोजन अनुपात – कंपोस्ट तैयार करने के लिए डाली जाने वाली सामग्रियों में विभिन्न अनुपात में या तो कार्बन होता है या नाइट्रोजन। एक स्वस्थ्य कंपोस्ट में इन दोनों तत्वों के बीच संतुलन होना जरूरी है।

कार्बन – ऐसी सामग्री जिनमें कार्बन की अधिकता होती है मसलन टहनियां, पौधे की जड़, सूखे पत्ते, छिलके, लकड़ियों के टुकड़े, छाल का बुरादा या लकड़ी का बुरादा, पेपर बैग के टुकड़े, मकई के डंठल, कॉफी फिल्टर, चीड़ की पत्तियां, अंडे के छिलके, पुआल, पीट का काई, लकड़ी का राख आदि कंपोस्ट को हल्का बनाता है।

नाइट्रोजन – नाइट्रोजन या प्रोटीन युक्त सामग्रियां (अपशिष्ट, भोज्य अपशिष्ट, लान की हरी घास, हरी पत्तियां आदि एंजाइम्स के निर्माण में सहायक हैं।

एक स्वस्थ्य कंपोस्ट के ढेर में नाइट्रोजन की तुलना में कार्बन का प्रतिशत ज्यादा होना चाहिए। इसके लिए सामान्य सा नियम है कि एक तिहाई हरी सामग्रियों का और दो तिहाई भूरी सामग्रियों का इस्तेमाल करना चाहिए कंपोस्ट बनाने में। भूरी सामग्री की स्थूलता आक्सीजन को भीतर पहुंचने में मदद करता है और उसमें मौजुद जीवाणुओं के पोषण में मदद करता है। बहुत ज्यादा नाइट्रोजन एक घने, बदबूदार और धीरे धीरे अपघटित होने वाला अवायवीय स्थूल का निर्माण करता है। नाइट्रोजन से समृद्ध सामग्रियों से बनने वाला कंपोस्ट स्वच्छ होता है जो कि खुली हवा के संपर्क में आने से बदबू देता है, इसमें कार्बन की अधिकता से कई बार सुगंधित हवा बाहर आती है। अगर शंका हो तो ज्यादा कार्बन मिलाइए।

कंपोस्ट बनाने के सरल तरीके 

कंपोस्ट बनाने में जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य है वो ये कि अपशिष्ट के ढेर को नियमित अंतराल पर मथते रहें। नो टर्न कंपोस्ट में आपका कंपोस्ट में बिना मथे ही वायु का संचरन हो सकेगा। 

सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अपशिष्ट का ढेर बनाते वक्त मोटे सामग्री मसलन घास या पुवाल ज्यादा मात्रा में अपशिष्ट के ढेर में मिलाया जाए। अगर ढेर को लगातार मिलाते रहा जाए तो कंपोस्ट जल्दी तैयार होता है और अध्ययन बताता है कि किसी अन्य तरीके से बनाए गए कंपोस्ट की तुलना में इस कंपोस्ट में नाइट्रोजन का स्तर अधिक होता है। 

पत्तियों से तैयार होने वाले कंपोस्ट – अगर कंपोस्ट तैयार करने के लिए अपशिष्ट के तौर पर आपके पास बहुत सारी पत्तियां हैं तो आप सिर्फ पत्तियों से भी कंपोस्ट तैयार कर सकते हैं। आप इन सारी पत्तियों का ढेर उस जगह बनाइए जहां जल निकासी का सटीक प्रबंध हो, छाया वाली जगह हो तो बेहतर है। इससे पत्तियां सूखेंगी नहीं। 

पत्तियों की ढेर का ब्यास 4 इंच औऱ उंचाई तीन इंच तक होनी चाहिए। पत्तों के ढेर के प्रत्येक स्तर पर धूल की परत चढ़ा दिया जाना चाहिए। पत्तों के इस ढेर में नमी ठीक ठाक होनी चाहिए। नमी इतनी हो कि अगर ढेर से एक पत्ती उठाकर उसे हाथ से निचोड़ा जाए तो दो तीन बूंद आद्रता हाथ में आज जाए। ढेर में पत्तों को बहुत ज्यादा ठूंस ठूंस कर न लगाया गया हो इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए।

चार से छह महीने में ये ढेर, काले और भूरभूरे कंपोस्ट के रूप में तैयार हो जाएगा। पत्तियों से बने कंपोस्ट का सर्वोत्तम उपयोग मिट्टी के जैविक संशोधक और कंडीशनर के तौर पर होता है। इसका उपयोग आमतौर पर बतौर उर्वरक नहीं होता है क्योंकि इसमें पोषक तत्व कम होते हैं। 

 

पत्तों के गुच्छों से बनी चाय – आप पत्तियों का इस्तेमाल अपने पौधों के लिए पोषक  चाय बनाने के लिए भी कर सकते हैं। सामान्य रूप में पत्तियों का एक छोटा से गुच्छा तैयार करके उसे टाट में बांध दीजिए और उसे कचरे के डब्बे में या पानी से भरे एक बड़े बाल्टी में डूबो दीजिए। तीन दिनों तक उसे ऐसे ही छोड़ दीजिए, फिर टाट से बंधी सामग्री (पत्तियों) को अलग कर दीजिए और सामग्री को कंपोस्ट में डाल दीजिए। अब उस बड़ी बाल्टी से एक छोटी बाल्टी या फव्वारे में पानी को निकाल कर उसे अपने पौधों या लॉन में इस्तेमाल करें।   

कंपोस्ट बनाने का बंद डब्बा 

घरेलु जरूरत के लिए कम मात्रा में कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए बंद डब्बे सबसे व्यवहारिक उपाय है। पैसे बचाने के लिए आप घर में ही इस्तेमाल किए जाने वाले कचरे के डब्बे का प्रयोग कर सकते हैं। पंद्रह सेंटीमीटर की दूरी पर कचरे के इस बड़े डब्बे या प्लास्टीक के ड्रम में हवा के संचरन के लिए 1.5 सेंटीमीटर का छेद कर दीजिए। इस डिब्बे को उच्च कार्बन और उच्च नाइट्रोजन वाली सामग्रियों के मिश्रण से भर दीजिए। कभी कभी इस मिश्रण को हिलाइए डुलाइए ताकि अगर मिश्रण में कही किसी बड़े टुकड़े की वजह से हवा का संचरन अवरूद्ध हुआ हो तो वो ठीक हो जाए। अगर डिब्बे का मुंह बंद हो तो डब्बे को उसके किनारे लेटा कर घुड़काया जाए। फोटो के मुताबिक डब्बे के दोनों किनारों को दो लकड़ियों में स्क्रू के सहारे टिकाया देना चाहिए। लकड़ियों के डंडे को डब्बे के अंदर से  2×2 या 2×4 स्क्रू के सहारे कस दें ताकि डब्बे के अंदर मौजुद सामग्री को इन डंडों के सहारे हिलाया जा सके। इनके बगैर डब्बे के अंदर सामग्री डब्बे के हिलाने के बाद भी एक जगह ही एकत्रित रहेगी। 

कंपोस्ट डब्बा या कंपोस्ट डायजेस्टर एक अन्य विकल्प है। कंपोस्ट डब्बे को किनारे और उपर से बंद करके नीचे से खोल दिया जाना चाहिए ताकि उसे ज़मीन पर सीधे रखा जा सके। रिहायशी इलाकों के घरों में जहां डब्बे छोटे होते हैं सामान्य तौर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले ये कंपोस्ट डब्बे होते हैं जिनके बंद होने की वजह से पालतु पशुओं से दूर रखा जा सकता है। कंपोस्ट के ये डब्बे बहुत सस्ते होते हैं लेकिन इनमें बंद सामग्रियों को हिलाना मुश्किल होता है इसलिए इनमें कंपोस्ट देर से कई महीनों में तैयार होते हैं। 

बंद डब्बा प्रणाली में सबसे कुशल ग्लासनुमा आकार का कंपोस्ट टंबलर होता है। बंद ड्रम या टंबलर प्रणाली में सामान्य से अधिक तापमान रखा जा सकता है क्योंकि दोनों इन्सुलेटर के रूप में कार्य करते हैं और इनको हिलाने डुलाने से सूक्ष्मजीवाणुओं में सक्रियता और हवा का संचरन बना रहता है। एक आंतरिक चप्पू (पैडल) वेंटिलेशन बनाए रखता है और खाद्य सामग्रियों को एक साथ इकठ्ठा होकर गुठली बनने से रोकता है। इससे कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया बहुत तीव्रता आती है। 

बंद टंबलर प्रणाली से निम्न फायदे होते हैं –

कंपोस्ट बनने की प्रक्रिया तीव्र होती है

– उच्च आंतरिक तापमान की वजह से सालों भर कंपोस्ट बन सकते हैं

– चूहों, कुत्तों या अन्य पालतु पशुओं आदि से इसे बचाया जा सकता है

– कंपोस्ट पूरी तरह डब्बों में बंद होता है दुर्गंधरहित होता है इसलिए रिहायशी इलाकों के अनुकूल है   

 

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