आप कैसे नमी युक्त विदेशी वनस्पति एक बंजर ज़मीन पर उगा सकते हैं पड़ गए चक्कर में लेकिन कृषक पी साईं कृष्ण इसका जबाव बड़ी ही आसानी से देते हैं – हाइड्रोपोनिक फार्मिंग या जलीय कृषि मतलब ये कि इस वनस्पति को जल में उगाए न कि मिट्टी पर।

कृष्णा बताते हैं मुझे ये कहा गया कि इस बंजर भूमि पर मुझे असफलता ही हाथ लगेगी। सालों भर ये इलाका तकरीबन 40 डिग्री सेल्सियस से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान में जलता है। लेकिन अपने फार्म सुपर ग्रिन्स इंडिया के जरिए साई एक नई कहानी लिख रहे हैं। चेन्नई से तकरीबन सत्तर किलोमीटर की दूरी पर श्रीपेरूंबुदुर के पास इडियारपक्कम में स्थित 1000 स्कावयर फीट का उनका विशाल फार्म हाउस विदेशी प्रजाति के पालक, रूसी और अमेरिकी प्रजाति के काले या करमसाग वनस्पति, मीर्च, तुलसी और पाक चोई की अनेकों प्रजातियां का घर बन चुका है।  

इन वनस्पतियों का फाइव स्टार होटलों और बड़े रेस्टोरेंट्स में बड़ी मांग है। लिहाज़ा इन मांगों की पूर्ति के लिए साई ने अपेक्षाकृत ठंडे वातावरण में उपाजाए जाने वाली इन वनस्पतियों का यहां उत्पादन शुरू किया। साईं कहते हैं यहां की जलवायु को देखते हुए इन वनस्पतियों की जलीय खेती ही संभव है। इसमें किसी तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और न ही इसे मिट्टी में उपजाया जाता है जिसमें कीटनाशकों के प्रभाव होने की आशंका रहती है। हम खनीज सामाधान का उपयोग करते हैं। जल का प्रसंस्करण एक आर ओ संयंत्र में किया जाता है औऱ पानी का पुनर्उपयोग करने के लिए सौर ऊर्जा के जरिए प्रति परासरण (रिवर्स ऑसमोसिस) किया जाता है। ये प्रक्रिया जैविक खेती से बेहतर है।

ये प्रक्रिया बहुत सरल है। पहले बीज को नारियल की भूसी औऱ चावल की भूसी से बने कॉयर पीट में बोया जाता है। दो सप्ताह के बाद पौधे को फौम स्पंज से बने कप में स्थांतरित किया जाता है। एक महीने तक इन्हें क्षैतीज जलीय प्रणाली में पोषक तत्वों से भरपुर जल में रखा जाता है और फिर एक खड़े पाइप में उन्हें डाल दिया जाता है।

कृष्ण कहते हैं इससे हमें तापमान, सूर्यप्रकाश औऱ आद्रता को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। कृष्णा कहते हैं कि कम लागत वाली इस तकनीक में कम जगह में ही काम हो जाता है। ये काम साल भर तक चलता रहता है। इतने भर से साई संतुष्ट नहीं है। आगे वो मिर्च की कुछ और प्रजातियां के साथ साथ लाल, हरे और सफेद टमाटर के साथ साथ काली मीर्च भी उपजाना चाहते हैं।

(अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान टाइम्स से साभार)

COMMENTS