देश के एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ने राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में हो रही पानी की किल्लत के मद्देनज़र  सोमवार (18 जनवरी, 2016) को ये खबर चलाई कि कपड़ा नगरी भीलवाड़ा की प्यास बुझाने के लिए अब ट्रेन से बीसलपुर बान्ध का पानी लाया जाएगा। भीलवाडा शहर में पेयजल किल्लत को देखते हुये 25 लाख लीटर पानी हर रोज ट्रेन से लाए जाने की कवायद शुरू हो गई है। खबर के मुताबिक अभी भीलवाड़ा शहर को छह दिन के अन्तराल में पेयजल पानी मिल रहा है। जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग ने सोमवार को इसके लिए डिमान्ड राशि रेलवे प्रशासन को जमा करा दी है। इसी के साथ भीलवाडा शहर को मंगलवार सुबह ट्रेन के माध्यम से पानी पहुंचना तय हो गया है।

पूरी दुनिया में पानी की किल्लत के मद्देनज़र भीलवाड़ा शहर से जुड़ी ये खबर महज़ बानगी भर है पानी की किल्लत और उससे निपटने के लिए किए जाने वाले प्रयासों के। देश भर में खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में तस्वीर और भयावह है। भीलवाढ़ा शहर है, जहां ट्रेन के जरिए पहुंचा जा सकता है तो पानी की किल्लत को दूर करने के लिए फौरी तौर पर ये उपाय कर लिया गया। अब रूख करते हैं ग्रामीण भारत का जहां एक रिसर्च के मुताबिक ग्रामीण भारत में रहने वाली एक महिला पानी के लिए औसतन प्रतिवर्ष 1825 मील की दूरी पैदल नापती। इस आंकड़े से जो गंभीर तस्वीर उभरती है दरअसल उसकी गंभीरता का अहसास हमें हो ही नहीं पाता है। ऐसा नहीं है कि ये तस्वीर सिर्फ भारत के कुछ शहरी और ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित है। पूरी दुनिया में प्रतिदिन की जरूरत के मुताबिक पानी जुटाने में प्रतिदिन 20 करोड़ घंटे खर्च हो जाते हैं। अब ये कल्पना कीजिए कि किसी गांव में एक परिवार की महिला अगर पानी के स्त्रोत से काम भर के पानी लाने में 20 चक्कर लगाती है और इसमें उसके कीमती पांच घंटे बर्बाद होते हैं तो अगर वो महिला इन पांच घंटों को बचा पाती तो क्या वो इन बचाए गए वक्त का इस्तेमाल अपने परिवार की बेहतरी के लिए किसी अन्य काम में नहीं कर सकती थी ? इस पांच घंटे के बच जाने से बेइंतहा फायदे हो सकते हैं उस महिला के स्वास्थ्य से लेकर उस घर की आर्थिक जरूरत तक।

water wheel 1दरअसल हम अपनी समस्याओं की गंभीरता को लेकर इस कदर सोचते ही नहीं लिहाज़ा उससे मुक्ति पाने तक के उपाय तक पहुंचना तो दूर की बात है। लेकिन ग्रामीण भारत में पानी की समस्या से जुझने वाले लोगों की इस समस्या को न्यूयार्क की सिंथिया कोएनिग ने न केवल महसूस किया बल्कि उस निपटने के लिए कुछ जुगाड़ खोजने में भी जुट गई। दिमाग के घोड़ों को काफी दौड़ाने के बाद सिंथिया ने इस परेशानी से निजात पाने के लिए पानी को ही चक्के पर दौड़ा दिया। आप भी चक्कर खा गए ? अरे साहब सिंथिया ने वाटर व्हील की रूपरेखा बनाई और अब उस रूपरेखा को वास्तविकता के धरातल पर उतार कर हज़ारों लोगों को पानी लाने ले जाने के कष्टसाध्य परिश्रम से निजात दिला दिया। सिंथिया ने पचास लीटर तक पानी लेकर एक धक्के में बड़े आराम से घुड़कने वाला कंटेनर बनाया जिसमें कोई भी व्यस्क व्यक्ति पचास लीटर पानी भर कर बड़े आराम से पानी के स्त्रोत से अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है।

waterwheel-indiaसिंथिया का मानना है कि इस कंटेनर के इस्तेमाल से इस तरह दिन भर पानी ढोने के काम लगी घर की एक महिला के सप्ताह में कम से कम 35 घंटे तक के वक्त की बचत होती है और पानी भर कर कंधे पर या सर पर मटका ढोने की दुरूहता से निजात वो अलग। सप्ताह में महत्वपूर्ण वक्त की इस बचत का घर की महिलाएं या लड़कियां कुछ सार्थक करने में अगर खर्च करती हैं तो घर की आय में बढ़ोत्तरी हो सकती है, लड़कियां पढ़ने का समय निकाल सकती हैं और सबसे बड़ी बात कि पानी ढोने से जो उनकी शारीरिक संरचना पर जोर पड़ता है उससे उनको निजात मिलता है।

महाराष्ट्र में ऐसे ही एक गांव में रहने वाली मंगला से जब हमारी मुलाकात हुई तो पानी को लेकर उसने अपने अनुभव हमसे साझा किए। मंगला और उनकी मां पानी लाने के लिए आधी रात को उठकर इलाके के कुएं तक पहुंचने के लिए घर से निकलती थीं, जहां वो रात को दो बजे पहुंचती। कुएं में पानी का स्तर इतना नीचे होता है कि एक व्यक्ति रात के अंधेरे में रस्सी के सहारे कुंए में उतरता और उनके पानी के बर्तन को भर कर उपर भेजता। अब बीस लीटर के मटके को दोनों मां बेटी अपने सर पर रखकर रात के अंधेरे में घंटों तक चलकर घर लेकर आती। वाटर व्हील के इस्तेमाल ने उनके जीवन को आसान कर दिया। बातचीत में मंगला सर के उस हिस्से को भी दिखाती हैं जहां पानी ढोने की वजह से उनको लगातार दर्द होता था। वाटर व्हील की उपयोगिता को देखते हुए महाराष्ट्र के ही गड़ेरियों के एक गांव में तकरीबन साठ वाटर व्हील खरीदा गया।

WaterWheel-user-in-India-008कहने का मतलब ये कि ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं देश भर में जहां सिंथिया की जुगाड़ टेक्नोलॉजी वाटर व्हील ने लोगों खासतौर पर महिलाओं और लड़कियों के जीवन को आसान बनाया है। समस्या की गहराई से पड़ताल और थोड़े से ठंडे दिमाग से उसका निदान खोजने के संकल्प से हम और आप, हर कोई अपने जीवन को इसी तरह की कोशिश से आसान कर सकते हैं। तो चलिए उठिए कुछ ऐसा ही आप भी सोचिए। कब तक ट्रेन से आने वाले पानी का इंतजार करेंगे।

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