घरौंदा (हरियाणा) : खड़ी या लंब (वर्टिकल) खेती, टपक (ड्रिप) सिंचाई, मृदा सौरीकरण और इसी तरह की कुछ और शब्दावलियों से 40 साल के किसान दीपक खातकर तब तक खासे परेशान थे जब तक कि वो दो साल पहले पहली बार सब्जियों की बेहतरी के लिए गठित भारत-इजरायल उत्कृष्ट केंद्र नहीं पहुंच गए। कौतूहल या जानने की इच्छा के चलते उन्होंने इजरायली खेती के कौशल को अपनाया और कुछ महीने के भीतर ही उत्पादन में उन्हें चौंकानेवाला पांच गुना तक का इजाफा देखने को मिला।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर करनाल जिले के शेखपुरा खालसा गांव के खातकर कहते हैं, ‘हम लोग अपने खेतों में गेहूं और जौ की खेती परंपरागत तरीके से करते आ रहे थे लेकिन केंद्र पर जो तकनीक मैंने सीखी उसने मुझे सब्जी उत्पादन में हाथ आजमाने को बाध्य कर दिया।‘

खातकर के पास सात हेक्टेयर जमीन है जिसमे से करीब तीन हेक्टेयर जमीन पर वो फिलहाल इजरायली प्रौद्योगिकी के मुताबिक सब्जी की खेती कर रहे हैं।Israeli Farming

इसके साथ ही वो बताते हैं, ‘मैं चेरी टमाटर, बीजहीन खीरा, बैंगन और रंगीन शिमला मिर्च का उत्पादन कर रहा हूं। वैसे दूसरे किसान जो इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं उनके मुकाबले मेरे खेत में उत्पादन चार से पांच गुना ज्यादा हो रहा है।‘

हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से 145 किलोमीटर दूर स्थित छह हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केंद्र को जनवरी 2011 में खोला गया। भारत सरकार ने छह करोड़ की लागत से इसकी स्थापना 2008 में भारत और इजरायल के बीच हुए कृषि सहयोग समझौते के तहत की थी।

इजरायल के विशेषज्ञ लगातार केंद्र का दौरा करते रहते हैं और किसानों के लिए मुफ्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन करते हैं। इसमे उन्हें ‘रक्षात्मक कृषि’ के बारे में जानकारी दी जाती है और बताया जाता है कि कैसे पानी और खाद का कम से कम इस्तेमाल करते हुए ज्यादा फसल उगाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ भी केंद्र का दौरा करते हैं।Israeli Expert

इसके अतिरिक्त, कॉर्पोरेट और पेशेवर लोगों को भी नाममात्र फीस में गुणवत्तावाली सब्जियों के उत्पादन के बारे में पढ़ाया जाता है।

इजरायली दूतावास के प्रवक्ता ओहद होरसान्दी ने बताया कि, ‘प्रायोगिक शोध और तकनीक के विचार को भारत के विभिन्न राज्यों के किसानों तक पहुंचाने का विचार हुआ। इन केंद्रों की स्थापना के लिए सात भारतीय राज्यों ने इजरायल के साथ समझौते किये गए हैं, जिनमे से अब तक सबसे सफल मॉडल हरियाणा साबित हुआ।‘

इस वक्त देश में उत्कृष्टता के दस केंद्र हैं जिनमें आम, अनार और नींबू-संतरा पर खास ध्यान रखा गया है। 2015 तक ऐसे केंद्रों को बढ़ाकर 28 करने की योजना थी और ऐसे केंद्रों का विस्तार फूलों, मधु मक्खी पालन और डेयरी उद्योग तक कर दिया गया।

घरौंदा केंद्र के प्रोजेक्ट मैनेजर एस के यादव के मुताबिक इन केंद्रों पर 60 से अधिक किसान ना सिर्फ हरियाणा से बल्कि हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और यहां तक कि तमिलनाडु जैसे राज्यों से भी प्रतिदिन पहुंचते हैं। पिछले साल 16,000 से अधिक किसानों को इस केंद्र पर प्रशिक्षित किया गया।

यादव बताते हैं, ‘किसानों के सामने विभिन्न प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन किया जाता है ताकि वो इन तकनीक में से जो उनके लिए सटीक हैं उसका चुनाव कर सकें और जिससे उनको ज्यादा उपज और मुनाफा भी हो।’

खातकर के गांव से एक दूसरे किसान 50 साल के बिजेन्द्र फोर भी अनाज की उपज से धीरे धीरे अब सब्जी उत्पादन की ओर शिफ्ट कर रहे हैं, उनका कहना है कि किसानों की जिंदगी को बदलने के मामले में ये केंद्र अहम भूमिका निभा रहा है।

फोर कहते हैं, ‘खड़ी खेती के तरीके में जमीन पर फसल को खड़ा करने से जगह की काफी बचत होती है वहीं, ड्रिप या टपक सिचाई से 90 फीसदी तक पानी की बचत होती है। ये सब तरीके क्रांतिकारी है।‘

‘रक्षात्मक कृषि’ की संकल्पना हालांकि महंगी है क्योंकि इसके लिए ग्रीनहाउस, पॉलिहाउस की जरूरत पड़ती है। हालांकि, सरकारी सब्सिडी यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी किसान इस काम को आसानी से शुरू कर सके।green house

फोर कहते हैं, ‘ड्रिप सिंचाई और स्वचालित सिंचाई व्यवस्था के लिए हमें 90 फीसदी तक सब्सिडी मिली, जबकि पॉलिहाउस के लिए सरकार की ओर से 65 फीसदी की छूट मिली।’

फोर और उनके जैसे और दूसरे किसान इस केंद्र के सौजन्य से अब अपने उत्पाद मदर डेयरी जैसे चेन को सीधे बेच रहे हैं।

यादव बताते हैं, ‘हम रिटेल चेन वालों को किसानों का नाम, संपर्क और उनके उपज का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराते हैं ताकि वो बिना बिचौलिये के उन्हें सीधे उनसे संपर्क कर सकें’।

वो बीज कंपनियों को बीज की गुणवत्ता में सुधार लाने के बारे में कीमती फीडबैक देने के मामले में सरकार की भूमिका को भी रेखांकित करते हैं। यादव कहते हैं, ‘हम लोग केंद्र में स्थित पॉलिहाउस टनल में पौधे के सैंपल की जांच करते हैं। एक बार बढ़ जाने के बाद फसल को किसानों के लिए प्रदर्शित करते हैं, उनके फीडबैक के साथ उसमे सुधार के तरीकों के साथ सुझाव को कंपनियों का वापस भेज देते हैं।’

COMMENTS

Share This: